पाकिस्तानी टिड्डों के हमले से उत्तरी गुजरात में फसल चौपट

गांधीनगर

टिड्डी दल ने आठ हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में सरसों, अरंडी, मेथी, गेहूं और जीरे की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया

पाकिस्तान की ओर से आए लाखों टिडि्डयों के दल ने उत्तरी गुजरात में हजारों हेक्टेयर में खड़ी फसल को चौपट कर दिया है। किसानों की मानें तो घर का सारा काम छोड़कर वे परिवार समेत खेतों में टिड्डियों को भगाने में लगाने हुए हैं, बावजूद फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। गुजरात के किसान संगठनों के अनुसार आठ हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में खड़ी फसल को इस टिड्डी दल ने नुकसान पहुंचाया है और बनासकांठा ज़िले की सुईगाम, डांटा, थराड और वाव तहसीलों के किसान इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। हालांकि गुजरात सरकार का दावा है कि स्थिति अब नियंत्रण में है और पांच हज़ार हेक्टेयर से अधिक भूमि पर तकरीबन 4900 लीटर कीटनाशक का स्प्रे करके या तो टिड्डियों को मार दिया गया है या उन्हें खदेड़ा गया है। साथ ही राज्य के कृषि विभाग ने खराब हुई फसल के बदले में किसानों को मुआवजा देने का आश्वासन दिया है। टिड्डी दल के हमले से किसान कैसे निपटे, फसल का कितना नुकसान हुआ है और फिलहाल वे बचाव के लिए क्या कर रहे हैं, इन सवालों के जवाब ढूंढने के लिए एक न्यूज एजेंसी की टीम बनासकांठा पहुंची।

बनासकांठा जिले के नारोली गांव में टीम की मुलाकात कुछ किसानों से हुई जो टिड्डियों को उड़ाने के लिए खेतों में जमा हुए थे। इन लोगों के हाथों में थालियां थीं। टिन के डब्बे थे और उन्हें बजाने के लिए सभी ने लकड़ियां ले रखी थीं। इन्हें पीटने पर जो आवाज निकलती है, वो खेतों में काफी दूर तक सुनाई देती है। स्थानीय लोगों का तजुर्बा है कि टिड्डियां तेज आवाज सुनकर अपनी जगह छोड़ देती हैं। लेकिन इस काम में उनका बहुत सारा वक्त जाया हो रहा है। नारोली गांव में रहने वाली कमला पटेल ने बताया कि ‘पूरा परिवार टिड्डियां उड़ाने में लगा है। खाना खाने का वक्त नहीं निकाल पा रहे। बस सुबह उठते हैं और ये बर्तन लेकर खेतों में आ जाते हैं। फिर भी फसल को काफी नुकसान हो चुका है। इसी गांव में रहने वाली पार्वती पटेल की जीरे और मेथी की फसल को काफी नुकसान हुआ है। वो कहती हैं, ‘फसल बोने के बाद हमने इसमें दो महीने लगाये। पर ये टिड्डियां दो घंटे में फसल का आधे से ज्यादा हिस्सा चबा गईं।’

केंद्र और राज्य सरकार की टीमें कर रही काम

गुजरात के कृषि मंत्री आरसी फलदू ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि टिड्डों की संख्या से ही यह पता चलता है कि इन्होंने फसल को कितना नुकसान पहुंचाया होगा पर केंद्रीय सरकार और राज्य सरकार द्वारा बनाई गई टीमें लगातार इस पर काम कर रही हैं। राज्य के कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि टिड्डी दल के एक बड़े हिस्से का नष्ट कर दिया गया है। इसके लिए सैकड़ों लीटर कीटनाशक इलाके में छिड़ना पड़ा है। फिलहाल बची हुई टिड्डियां गुजरात की सीमा से सटे जालौर ज़िले (राजस्थान) की ओर निकल गई हैं। केंद्र सरकार की टीमें इनके पीछे हैं। कृषि विज्ञानियों के अनुसार ये ‘डेजर्ट हॉपर’ प्रजाति की टिड्डियां हैं जो काफ़ी लंबी दूरी तक उड़ सकती हैं। झुंड के बीच इन टिड्डियों का रवैया बहुत आक्रामक होता है।

टिड्‌डों के हमले के कारण बोलीविया में घोषित करना पड़ा था आपातकाल

साल 2017 में बोलीविया की सरकार को एक बड़े कृषि क्षेत्र में टिड्डों के हमले के कारण आपातकाल घोषित करना पड़ा था। ब्रिटेन के खाद्य एवं पर्यावरण संस्थान यानी फेरा ने इस कीट पर एक दफा शोध किया था जिसमें पाया गया था कि इस टिड्डे की खाने की क्षमता और रफ्तार मवेशियों से कहीं तेज है। ये टिड्डे वजन के आधार पर अपने से कहीं भारी आम पशुओं के मुकाबले आठ गुना ज्यादा तेज रफ्तार से हरा चारा खा सकते हैं।

पाक के थारपारकर से आईं टिडि्डयां मारने के लिए चलाया ऑपरेशन

कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी पूनमचंद परमार ने कहा है कि गुजरात में अब ना के बराबर टिड्डियां बची हैं। पिछले तीन दिन चले ऑपरेशन में अधिकांश को मार दिया गया है। उन्होंने बताया, ‘सरकार ने दस हज़ार हेक्टेयर भूमि का सर्वे करवा लिया है जिसमें से सात हज़ार हेक्टेयर जमीन पर टिड्डियों के होने के निशान मिले हैं। ये टिड्डियां पाकिस्तान के थारपारकर से आई थीं। उत्तरी गुजरात का यह इलाका इन टिड्डियों के प्रवास मार्ग में पड़ता है।’

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