चोरी के इस किस्से को सुन आपको दुःख से ज़्यादा हंसी आएगी

नेहा श्रीवास्तव,इंदौर। रांझणा मूवी देखी है, जब कुंदन (धनुष) को हॉस्टल में घुसते हुए जेएनयू के कुछ छात्र पकड़ लेते हैं तो वो बताता है मैं चोर हूँ। सब पूछते हैं चोर क्यों बने कुंदन का जवाब ग़रीबी होती है। फिर रात भर सोचने के बाद भी जब वो किसी नतीजे पर नहीं पहुँचते हैं तो बस मान लेते हैं कि वो गरीब है।

पर ये किस्सा उससे भी दो कदम आगे है आप चाहे कितना भी सोच लें समझ ही नहीं आएगा कि चोर गरीब है या आदत से मज़बूर।

दरअसल दिल्ली के मानसरोवर पार्क के इलाके में एक चोर ने रातभर प्रयास के बाद डाकघर की दो फीट चौड़ी दीवार काटी और तिजोरी का ताला भी तोड़ दिया, लेकिन उसमें से उसे महज 487 रुपये ही मिले। आश्चर्य की बात ये है कि चोर निराश नहीं हुआ और चोर ने उनको ले जाना ही बेहतर समझा।

सब पोस्ट मास्टर कुलदीप सिंह वर्मा ने जब पोस्ट ऑफिस खोला, तो उन्हें दीवार में सेंध दिखी। वो तुरंत वहां पहुंचे जहां कैश रखा था। देखा कि तिजोरी भी खुली हुई थी। उसमें से 487 रुपये गायब थे।

फ़ोटो साभार- हिन्दुस्तान टाइम्स

पोस्ट मास्टर कुलदीप सिंह वर्मा ने बताया, “वह मानसरोवर पार्क के ‘बी’ ब्लॉक स्थित पोस्ट ऑफिस में पोस्ट मास्टर हैं। वह 28 दिसंबर शाम करीब 5:30 बजे पोस्ट ऑफिस को बंद करके अपने घर चले गए। वह सोमवार 30 दिसंबर की सुबह करीब 8:45 बजे पोस्ट ऑफिस पहुंचे। उन्होंने देखा कि सामने वाली दीवार में एक बड़ा सा छेद हो रखा है। कैश चेस्ट भी खुला पड़ा था।”

पुलिस के मुताबिक, जब वो स्पॉट पर पहुंचे, तो उन्होंने 5 हजार रुपये के सिक्के देखे, जो एक बैग में रखे हुए थे। जिसे चोर ने छुआ तक नहीं था। पुलिस का अनुमान है कि शायद चोर उस बैग को देख नहीं पाया।

मामले की जांच कर रहे अधिकारी ने बताया, “बाकी के पोस्ट ऑफिस में बड़े पैमाने पर कैश का लेने-देन होता है, पर इस पोस्ट ऑफिस में ऐसा नहीं होता है, और ये बात शायद चोर को नहीं पता थी। इस पोस्ट ऑफिस में सीसीटीवी कैमरा नहीं है।”

पुलिस का कहना है कि चोर को शायद पोस्ट ऑफिस के बारे में हर चीज पता थी। इसी वजह से वो आसानी से चोरी को अंजाम दे पाया। पुलिस का कहना है कि वो जांच कर रही है कि इस घटना में चोर एक था या कई थे।

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