6 साल पहले मर चुके बन्ने खां पर शांति भंग करने का आरोप है

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर। नागरिकता संशोधन कानून यानी के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश में कई जगहों पर हिंसक प्रदर्शन भी हुए हैं। इस तरह के प्रदर्शनों पर लगाम लगाने के लिए फिरोजाबाद पुलिस ने उन लोगों के खिलाफ नोटिस जारी किया है जिनपर शांति भंग करने का खतरा है।

पुलिस ने कुछ ऐसे लोगों को नोटिस भेजा है जो इस दुनिया में है ही नहीं। वहीं कुछ बुजुर्गों को भी नोटिस जारी किया गया है, जिनकी उम्र 90 के पार है। अब पुलिस की लापरवाही पर सवाल उठ रहे हैं।

आख़िर क्या है ये मामला ?

पूरा मामला सीएए के विरोध में हुए प्रदर्शन का है। 20 दिसंबर, 2019 को फिरोजाबाद में जुमे की नमाज के बाद उपद्रवियों ने आगजनी और पथराव किया था। सरकारी और कई प्राइवेट वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया था। पुलिस चौकी में भी आग लगा दी गई थी। हिंसक प्रदर्शन में कई लोगों की मौत भी हो गई थी।

शांति भंग न हो इसके लिए यूपी पुलिस ने करीब 200 लोगों की पहचान की थी और उन्हें नोटिस भेजा था। इन्हीं 200 लोगों में बन्ने खां का नाम भी पुलिस ने जोड़ दिया। पुलिस ने इस मामले में 49 मुकदमे दर्ज किए हैं। 29 नामजद और 2,500 अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। इनमें से 14 को जेल भेज दिया गया है।

जिसमें से एक नाम बन्ने खां का भी था, जो छह साल पहले ही गुजर गए थे। नोटिस में कहा गया है कि बन्ने खां को सिटी मजिस्ट्रेट के सामने पेश होना होगा और 10 लाख रुपये का जुर्माना भर कर जमानत लेनी होगी। लेकिन बन्ने खां तो इस दुनिया में है ही नहीं, छह साल पहले ही उनकी मौत हो चुकी है। अगर ज़िंदा होते तो वो 100 साल के होते।

इसी कड़ी में फिरोजाबाद के कटरा पठानान के रहने वाले 90 वर्षीय अंसार हुसैन से भी पुलिस को शांति भंग होने का खतरा है। इसलिए उन्हें पाबंद कर दिया गया है। जामा मस्जिद के सचिव और समाजसेवी सूफी अंसार हुसैन जो कि 58 वर्ष तक जामा मस्जिद की सेवा कर चुके हैं, वो अब बीमार रहते हैं।

बन्ने खां के बेटे तथा सिटी मजिस्ट्रेट ने क्या कहा

मृतक बन्ने खां के बेटे मो. सरफराज ने बताया कि उनके पिता का इंतकाल 6 साल पहले हो गया था, पुलिस ने उनके खिलाफ जो भी नोटिस भेजा है और उनका नाम अखबार में दे दिया है। पुलिस को इसकी इंक्वायरी करनी चाहिए कि वो इस दुनिया में हैं या नहीं।

जब सिटी मजिस्ट्रेट कुंवर पंकज सिंह से इन लोगों के खिलाफ शांति भंग की आशंका को लेकर विरोधात्मक कार्रवाई के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था “यदि कोई ऐसा मामला प्रकाश में आता है, जो गलत है। तो उसका नाम लिस्ट से निकाल दिया जाएगा। जब 20 तारीख को शहर में बवाल हुआ था उस समय हम लोगों के ऊपर बहुत दबाव था।”

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