सरकारी जिला अस्पताल अब निजी अस्पतालों के हाथों में जा सकते हैं

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर। चिकित्सकीय शिक्षा में उच्च शिक्षा प्राप्त डॉक्टरों की कमी की खाई को पाटने के लिए नीति आयोग ने पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप योजना) अपनाने का सुझाव दिया है। इसके जरिये नए या मौजूदा निजी मेडिकल कालेजों को जिला अस्पतालों के साथ मिल-जुल कर काम करेगा ताकि जिला अस्पताल में मेडिकल की सीटें बढ़ाई जा सके।

केंद्र की प्रमुख थिंक टैंक नीति आयोग ने सरकारी जिला अस्पतालों के संचालन की जिम्मेदारी निजी हाथों में देने की योजना बनाई है। आयोग द्वारा जारी 250 पन्नों के दस्तावेज से इसका खुलासा हुआ है।

भारत में क्वालिफाइड डॉक्टरों की खासी कमी है। इसलिए व्यवहारिक रूप से केंद्र व राज्य सरकारों को चिकित्सकीय शिक्षा में आई खाई को मौजूदा संसाधनों और धन से नहीं पाटा जा सकता है।

दस्तावेज में कहा गया है कि इससे ना सिर्फ मेडिकल की सीटें ही बढ़ेंगी बल्कि चिकित्सा शिक्षा की कीमतों में भी तार्किक कमी आएगी। इसमें सुझाव दिया गया है कि जिला अस्पतालों से संबद्ध मेडिकल कालेजों में हर साल 150 एमबीबीएस स्टूडेंट्स का दाखिला हो सकेगा। मुफ्त इलाज वाले मरीजों से दस रुपये की रजिस्ट्रेशन फीस लेने का भी सुझाव दिया गया है।

इस महीने के अंत में शेयरधारकों की एक बैठक की तारीख तय की गई है। इस तरह के जिला अस्पतालों में कम से कम 750 बेड होने चाहिए। इसमें लगभग आधे ‘मार्केट बेड’ और बाकी ‘रेग्यूलेटेड बेड’ के रूप में होंगे। मार्केट बेड की कीमत बाजार के आधार पर होगी। इसी की बदौलत रेग्यूलेटेड बेड पर छूट दी जा सकेगी।

वहीं पिछले साल के नवंबर माह में सरकार ने मध्यम वर्ग के लिये स्वास्थ्य व्यवस्था तैयार करने का प्लान कर रही थी। जिसमें ये सुविधा उन लोगों के लिए जो अब तक किसी सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के दायरे में नहीं आते हैं। नीति आयोग ने इसकी रूपरेखा जारी करते हुए यह बात कही थी।

आगे बताया गया था कि इस नई स्वास्थ्य प्रणाली में उनको शामिल नहीं किया जाएगा जो आयुष्मान भारत योजना के दायरे में हैं। इस योजना के दायरे में कुल आबादी का 40 प्रतिशत आता है। ये वे गरीब लोग हैं जो स्वयं से स्वास्थ्य योजना लेने की स्थिति में नहीं है।

नीति आयोग ने ‘नए भारत के लिए स्वास्थ्य प्रणाली ब्लॉक निर्माण-सुधार के लिए संभावित मार्ग’ शीर्षक से रिपोर्ट जारी करते हुए यह बात कही थी। यह रिपोर्ट नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने जारी की थी। इस मौके पर बिल और मेलिन्डा गेट्स फाउंडेशन के सह-अध्यक्ष बिल गेट्स भी मौजूद थे।

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