‘ईसाई स्कूलों में बच्चे पढ़ने वाले अधिकतर बच्चे गौ मांस का भक्षण करते हैं’- गिरिराज सिंह

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर। अगर गिरिराज सिंह के बेतुके बयानों की लिस्ट बनायी जाए तो शायद ये आपकी रिज़ॉल्यूशन लिस्ट से भी लंबी हो। नए साल की शुरुआत हो चुकी है और बयानों का दौर भी ज़ोर पर है।

बीजेपी के फायर ब्रांड नेता और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने स्कूलों में गीता का श्लोक पढ़ाने और मंदिर बनाने की मांग की है। बेगूसराय पहुंचे गिरिराज सिंह ने कहा कि आज धर्म और सनातन है इसलिए लोकतंत्र जिंदा है।

आज जरूरत है कि प्राइवेट स्कूलों में बच्चों को गीता का श्लोक सिखाया जाए। स्कूल में मंदिर बनाया जाए क्योंकि ईसाई स्कूलों में बच्चे पढ़ लिख कर डीएम, एसपी, इंजीनियर तो बन जाते हैं लेकिन वही बच्चे जब विदेश जाते हैं तो 10 में से अधिकतर बच्चे गौ मांस का भक्षण करते हैं क्योंकि उन्हें वो संस्कार ही नहीं मिल पाता है।

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह बेगूसराय के लोहिया नगर में भागवत कथा के उद्घाटन समारोह में हिस्सा लेने पहुंचे थे। समारोह को संबोधित करते हुए गिरिराज सिंह ने विरोधियों पर निशाना साधा और लोगों से यह अपील की।

गिरिराज सिंह ने कहा, “लोग हमें कट्टरपंथी कहते हैं हम कहाँ से कटटरपंथी बन पाएंगे क्योंकि हमें पूर्वजों एवं धर्म ने सिखाया कि चींटियों को गुड़ खिलाने से, पेड़ में पानी डालने से फल मिलता है। आज हमें ज़रूरत है कि प्राइवेट स्कूलों में गीता का श्लोक और हनुमान चालीसा प्रार्थना में कराई जाये।”

उन्होंने आगे कहा कि सरकारी स्कूलों में अगर वो गीता का श्लोक, हनुमान चालीसा पढ़ने की बात कहेंगे तो लोग कहेंगे भगवा एजेंडा लागू किया जा रहा है इसलिए इसकी शुरुआत प्राइवेट स्कूलों से ही होनी चाहिए। इतना ही नहीं हम आस्तीन के सांप को भी नाग पंचमी के दूध पिलाते हैं लेकिन वही सांप आज रोज गालियां दे रहे हैं और रोज डस रहे हैं।

मालूम हो कि गिरिराज सिंह की छवि एक कट्टर हिंदू नेता की है और वो समय-समय पर धर्म को लेकर बयान देते रहते हैं।

पिछले साल लोकसभा चुनाव की सरगर्मियों के बीच ‘मशहूर’ केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह की जुबान पीएम मोदी के खिलाफ ही फिसल गई थी। उन्होंने कहा कि जब से ‘मोदी जी की सरकार बनी है मोदी जी ने आतंकवाद का समर्थन किया है। मोदी जी ने सेना को गाली दी है।’

इसके अलावा गिरिराज सिंह ने पिछले साल मतदान के दौरान बुर्के पर रोक लगाने की मांग की थी। गिरिराज सिंह ने कहा कि बुर्के की आड़ में बोगस वोटिंग होती है। उन्होंने कहा कि मतदान के दौरान बुर्के पहनने पर रोक लगनी चाहिए।

इन्होंने एक चुनावी सभा के दौरान देश के मुसलमानों को चेतावनी दे दी थी। गिरिराज ने कहा था कि यदि मुस्लिम समाज को कब्र के लिए तीन हाथ जगह चाहिए तो उन लोगों को इस देश में वंदेमातरम गाना होगा और भारत माता की जय कहना होगा।

भारतीय संविधान के प्रमुख निर्माताओं में से एक डॉक्टर बीआर अंबेडकर अच्छे शोधकर्ता भी थे। उन्होंने गोमांस खाने के संबंध में एक निबंध लिखा था, ‘क्या हिंदुओं ने कभी गोमांस नहीं खाया?’ यह निबंध उनकी किताब, ‘अछूतः कौन थे और वे अछूत क्यों बने?’ में है।

जिसमें अंबेडकर लिखते हैं कि “गाय को पवित्र माने जाने से पहले गाय को मारा जाता था। उन्होंने हिन्दू धर्मशास्त्रों के विख्यात विद्वान पीवी काणे का हवाला दिया। काणे ने लिखा है, ऐसा नहीं है कि वैदिक काल में गाय पवित्र नहीं थी, लेकिन उसकी पवित्रता के कारण ही बाजसनेई संहिता में कहा गया कि गोमांस को खाया जाना चाहिए।”

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