जहाँ सीएए पर कांग्रेस इतनी मुखर है वहीं कोटा में मर रहे बच्चों के अस्पताल में ग्रीन कार्पेट बिछाए जाने पर आख़िर क्यों खामोश है?

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर। आपको एक दृश्य दिखाना चाहती हूँ। सोचिये एक अस्पताल में लगभग 100 से ज़्यादा बच्चे मर चुके हैं, माओं का रो- रो कर बुरा हाल है, पिता एक कोने में अपनी बेबसी पर सिसक रहा है तथा फिर कुछ लोग आते हैं और अस्पताल में ग्रीन कार्पेट बिछाने लगते हैं। क्योंकि उस अस्पताल में मंत्री जी आने वाले होते हैं।

कुछ समझ आ रहा है, मुझे ये दृश्य देख सिद्धार्थ की कहानी याद आ रही है कौन सिद्धार्थ? वही सबके चहीते गौतम बुद्ध। कौन सी कहानी? पहली बार ग्राम भ्रमण की कहानी।

कोटा के जेके लोन अस्पताल में दिसंबर से अब तक मरने वाले बच्चों की संख्या बढ़कर 105 हो गई है। शुक्रवार की सुबह यहाँ एक और मासूम ने दम तोड़ दिया। जिस बच्ची की मौत हुई वह केवल 15 दिन की थी। माँ-बाप ने उसका नाम भी नहीं रखा था।

फ़ोटो क्रेडिट- सोशल मीडिया

राजस्थान के कोटा में बच्चों की मौत के मामले में गहलोत सरकार की काफ़ी फजीहत हुई है। दरअसल, शुक्रवार को कोटा के जेके लोन अस्पताल में राजस्थान के चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा और परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास का दौरा होना था। अस्पताल में दौरा होने से पहले मंत्री के स्वागत की तैयारी शुरू हुई। पूरे अस्पताल की साफ सफाई कराई गई तथा मेन गेट पर कारपेट बिछाया गया।

इस बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है, “चिकित्सा मंत्री को कोटा जाने की जरूरत नहीं है। यह तो मीडिया ने माहौल बनाया है इसलिए कोटा जाना पड़ रहा है। बीजेपी की सरकार थी तो 1000 बच्चे मरते थे और हमारे समय में 900 बच्चे मर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि नवजात बच्चों की मौत बहुत गंभीर बात है।”

हालांकि, बाद में कालीन को हटा दिया गया। इस बीच बीजेपी ने कांग्रेस पर निशाना। बीजेपी नेता अनिल जैन ने कहा कि ग्रीन कार्पेट दिखाता है कि राजस्थान की सरकार कितनी संवेदनशील है।

राजस्थान कोटा के अस्पताल में लगातार हो रही बच्चों की मौत पर सियासत जारी है। बीजेपी युवा मोर्चा ने आज अस्पताल के बाहर प्रदर्शन किया। स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा का विरोध करने पहुंचे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया। सभी प्रदर्शनकारियों को पुलिस पशुओं के वाहन में ले गई।

यह राजस्थान के उस खस्ताहाल अस्पताल की हकीकत है जहॉं बीते 6 साल में 6646 बच्चे मरे हैं। ये आँकड़े खुद राजस्थान सरकार के हैं और इसे राज्य के स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा ने ट्विटर पर साझा किया है। इन्हीं आँकड़ों का हवाला दे राज्य सरकार कह रही कि पहले 1500 बच्चे मरते थे।

इस साल सबसे कम बच्चे मरे हैं। आप जब इन आँकड़ों पर गौर करेंगे तो पाएँगे कि बच्चों की मौत के मामले में मामूली कमी सरकारी व्यवस्था में सुधार के कारण नहीं हुआ है। इन आँकड़ों का एक सच यह भी है कि इस अस्पताल में दिसंबर महीने में सबसे ज्यादा मौत पिछले साल ही हुई है।

फ़ोटो क्रेडिट- सोशल मीडिया

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की रिपोर्ट के अनुसार अस्पताल की जर्जर हलात और वहाँ पर साफ-सफाई को लेकर बरती जा रही लापरवाही बच्चों की मौत का एक अहम कारण है। जेके लोन अस्पताल की ख़िड़कियों में शीशे नहीं हैं। दरवाजे टूटे हुए हैं।

इसके कारण अस्पताल में भर्ती बच्चों को मौसम की मार झेलनी पड़ती है। अस्पताल के कैंपस में सूअर भी घूमते रहते हैं। अराजकता का आलम यह है कि जेके लोन अस्पताल के वार्ड में लगाने के लिए पिछले सप्ताह 27 हीटर खरीदे गए। लेकिन, ये हीटर कहॉं गए यह अस्पताल के अधीक्षक तक को मालूम नहीं है।

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