बड़ी ख़बरों के शोर तले दबी आईआईटी गुवाहाटी में जारी इस भूख हड़ताल के बारे में जान लीजिये

विभव देव शुक्ला

देश में फिलहाल कितना कुछ हो रहा है, कहीं सरकार का विरोध तो कहीं आम लोगों का गुस्सा। हमारे समाज की दीवारें खबरों से भरी पड़ी हैं, अक्सर कुछ न कुछ हमारे सामने होता ही रहता है। लेकिन बड़े शहरों के शोर तले ज़रूरी बातें दब जाती हैं पर आम लोगों तक हर ख़बर का पहुँचना ज़रूरी है। हमारे इर्द-गिर्द हो रहे किसी भी शोर के तले अगर कोई अहम बात हम तक नहीं पहुँचती तो परेशानी हमारे नज़रिये में है जिसे जल्द से जल्द बदलने की ज़रूरत है।

4 दिनों से जारी है भूख हड़ताल
देश के मशहूर संस्थानों में से एक है भारतीय प्रौद्यौगिकी संस्थान, गुवाहाटी। इस संस्थान के कुल 3 छात्र बीते 4 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं और छात्रों का कहना है कि जब तक संस्थान से जुड़ा कोई व्यक्ति उनसे बात करने नहीं आता तब तक उनकी भूख हड़ताल जारी रहेगी। भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों की मांग आईआईटी गुवाहाटी के एक प्राध्यापक से जुड़ी हुई है, हाल ही में वहाँ के प्राध्यापक बृजेश राय को समय से पहले सेनानिवृत्त होने का आदेश जारी कर दिया गया है।

क्या कहना है छात्रों का
छात्रों का कहना है कि इस आदेश को जारी करने के दौरान आईआईटी गुवाहाटी के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने नियमों की अनदेखी की है। हालांकि एक प्राध्यापक का इस तरह जबर्दस्ती सेनानिवृत्त किया जाना सही है या गलत इस पर भले चर्चा हो सकती है। लेकिन छात्रों का इसके अलावा भी बहुत कुछ कहना है, नए साल के पहले दिन प्राध्यापक को सरकारी आवास खाली करने का आदेश जारी कर दिया गया। नियमों के मुताबिक आवास खाली करने के लिए कम से कम 4 महीने का समय दिया जाता है। लेकिन बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने इस नियम का ध्यान नहीं रखा है।

जिन मुद्दों पर किसी का ध्यान नहीं है
भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों का यह भी कहना है कि इन 4 दिनों में संस्थान से जुड़ा कोई भी व्यक्ति उनसे मिलने नहीं आया। हड़ताल पर बैठे दो छात्रों की हालत भी अच्छी नहीं है लेकिन संस्थान के किसी अधिकारी ने उनसे बात करने की कोशिश तक नहीं की। उनका कहना है किसी भी व्यक्ति को उनसे बात करने में क्या परेशानी है? अगर वह भूख हड़ताल पर बैठे हैं तो उसके पीछे वजहों की एक सूची है जिनकी तरफ कोई ध्यान नहीं देना चाहता है। छात्र पिछले काफी समय से निदेशक से बात करना चाह रहे थे लेकिन कोई नतीजा न निकलने के बाद उन्होंने यह कदम उठाने का फैसला लिया।

नियुक्ति और संस्थान का बजट
इस मामले पर प्राध्यापक बृजेश राय का कहना है कि आईआईटी गुवाहाटी देश के सबसे मशहूर संस्थानों में से एक है। यहाँ आने वाले छात्र बहुत तरह की उम्मीदें लेकर आते हैं लेकिन जब उन्हें हालात समझ आते हैं तब निराश होने के अलावा उनके पास और कोई विकल्प नहीं बचता है। उनका कहना है कि संस्थान के भीतर तमाम तरह की दिक्कतें हैं जिसका नतीजा केवल छात्रों को भुगतना पड़ता है। बीते कुछ सालों में उन्होंने इस तरह की हर दिक्कतों का विरोध किया, चाहे वह नियुक्तियों से जुड़ी हों या संस्थान के बजट से जुड़ी हुई हों। जिसके चलते उन्हें जबर्दस्ती सेनानिवृत्त होने का आदेश दिया गया है।

निदेशक से संपर्क करने पर क्या हुआ
इस दौरान हमने आईआईटी गुवाहाटी के निदेशक से भी बात करने का प्रयास किया लेकिन उनसे बात नहीं हो पाई। वेबसाइट पर दिए नंबर में कॉल करने पर संस्थान के जनसम्पर्क विभाग का नंबर दिया गया और उन्होंने बात करने पर एक गलत नंबर थमा दिया गया।
3612582005
3612584000
2582314
इसके बाद जब दोनों नंबरों पर बात करने की कोशिश हुई तब उन्होंने कॉल नहीं उठाया। आईआईटी गुवाहाटी के जनसम्पर्क विभाग से लेकर निदेशक तक कोई भी व्यक्ति इस मामले पर बात करने के लिए तैयार नहीं है। फिलहाल ख़बरें यह भी आ रही हैं कि पुलिस भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों को उठा कर ले गई है और उनका नंबर भी बंद है। ऐसा तब हुआ है जब पहले से ही उनकी हालत अच्छी नहीं थी।

छात्रों पर दबाव भी बनाया गया
इस बात में कोई दो राय नहीं है कि मुद्दे पर और भी पक्ष हों, छात्रों और उनके प्राध्यापक के अलावा भी मामले का कोई पहलू हो। लेकिन छात्रों की इस भूख हड़ताल को नज़रअंदाज़ करना किसी भी सूरत मे सही नहीं कहा जा सकता है। उनकी मांगों को स्वीकार करना या अस्वीकार करना चर्चा का मुद्दा हो सकता है लेकिन उन्हें अनसुना कर देना कैसे सही कहा जा सकता है? कल ही एक छात्र ने बताया कि हड़ताल और विरोध कर रहे छात्रों पर दबाव भी बनाया जा रहा है कि वह पीछे हट जाएँ नहीं तो उन्हें इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है। लेकिन छात्रों का मत इस मामले में पूरी तरफ स्पष्ट है, वह अपनी बातों को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हैं।

Next Post

एक व्यक्ति जो जेएनयू में नकाबपोश हमले का 'साफ़ा' अपने सिर बांधना चाहता है

Tue Jan 7 , 2020
नेहा श्रीवास्तव, इंदौर। जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में 5 जनवरी की शाम जमकर बवाल हुआ। कुछ नकाबधारी गुंडों ने स्टूडेंट्स और टीचर्स पर हमला किया। उन्हें बुरी तरह पीटा, कैंपस के अंदर जमकर तोड़-फोड़ मचाई। घटना के बाद लेफ्ट संगठनों से जुड़े स्टूडेंट्स ने एबीवीपी वालों के ऊपर आरोप लगाए, तो […]