जब जेएनयू में हुई हिंसा का विरोध ‘फ्री कश्मीर’ के तले दब गया

विभव देव शुक्ला

देश का नामी शिक्षण संस्थान एक बार फिर चर्चा में है इस बार भी चर्चा की धुरी वहाँ पढ़ने वाले छात्र हैं। जिन पर कुछ नकाबपोश लोगों ने हमला किया है। खबरों की मानें तो कई लोग चेहरा ढक कर परिसर में घुसे। उनके हाथों में रॉड और डंडे भी थे, इन्हीं लोगों ने वहाँ मौजूद छात्रों को मारा पीटा। कई छात्र इस हमले में बुरी तरह घायल हुए और देर रात से ही जेएनयू का माहौल अच्छा नहीं है।

कश्मीर को आज़ाद करो
देश के तमाम इलाकों में इसका विरोध भी हो रहा है, आबादी का एक बड़ा हिस्सा इस घटना का पुरजोर विरोध कर रहा है। इस विरोध में युवाओं से लेकर बड़े बुजुर्ग भी शामिल और फिल्मी सितारों से लेकर राजनेता तक शामिल हैं। लेकिन अक्सर इस तरह के विरोध प्रदर्शनों का रास्ता बदल जाता है, कुछ ऐसा ही हुआ मायानगरी मुंबई में। गेटवे ऑफ इंडिया पर प्रदर्शन हो रहा था और अच्छी भली भीड़ हाथों में पोस्टर और तख्तियाँ लेकर जमा हुई थी।
इस दौरान एक लड़की के पोस्टर ने सभी का ध्यान खींचा, पोस्टर पर लिखा हुआ था ‘Free Kashmir’ यानी कश्मीर को आज़ाद करो। मामला कुछ ही देर में सुर्खियों में आ गया और हर तरफ बस एक ही सवाल था, फ्री कश्मीर क्यों? लोगों का इस मुद्दे पर कहना है कि विरोध जेएनयू में हुई हिंसा के खिलाफ था तो ऐसे में फ्री कश्मीर का क्या मतलब बनता है?

लॉकडाउन से क्या लेना देना
विवाद बढ़ने के बाद जिस लड़की ने इस पोस्टर के साथ विरोध किया था उसने अपनी तरफ से सफाई भी दी। लड़की ने कहा मेरा मतलब कश्मीर को आज़ाद कराने से नहीं था बल्कि कश्मीर में बीते कुछ महीनों से हुए इन्टरनेट शटडाउन और लॉकडाउन के विरोध में था। अगर मेरी बात से किसी भी तरह का भ्रम फैला तो उसके लिए मैं माफी मांगती हूँ।
लेकिन यहाँ तक मामला पूरी तरह विवादित हो चुका था और ख़बरों में आ चुका था। सबसे पहले महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने कहा विरोध असल में किस लिए है? ‘फ्री कश्मीर’ इस नारे की ज़रूरत क्या है? हम इस तरह के अलगाववादी तत्त्वों को आखिर कैसे स्वीकार सकते हैं? आज़ादी गैंग यह नारे मुख्यमंत्री आवास से महज़ 2 किलोमीटर की दूरी पर लगा रहा है। उद्धव जी क्या आप इसे सहन करने वाले हैं, क्या फ्री कश्मीर जैसे भारत विरोध नारे आपकी नाक के नीचे लगते रहेंगे?

क्या कहना है लड़की का
जिसके जवाब में शिवसेना के सांसद संजय राऊत ने कहा हमारी जानकारी में इस तरह के नारों को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा मुझे पता चला कि फ्री कश्मीर के पोस्टर के साथ विरोध प्रदर्शन हुए हैं। लेकिन विरोध करने वालों का कहना है कि यह पोस्टर जम्मू कश्मीर में बंद किए गए इन्टरनेट के खिलाफ था। इसका किसी जगह की आज़ादी से कोई लेना देना नहीं है, फिर भी हम उस तरह की सोच को कभी स्वीकार नहीं करेंगे।
पोस्टर वाली लड़की का नाम महक मिर्ज़ा प्रभु है, महक मुंबई की रहने वाली हैं और यहीं पैदा हुई हैं। एक वीडियो साझा करके उन्होंने कहा इस पोस्टर के पीछे मेरा न तो कोई एजेंडा था और न ही कोई उद्देश्य था। मेरा मतलब जम्मू कश्मीर में कई महीनों से जारी शटडाउन का विरोध करना था। जिसे सोशल मीडिया पर बहुत गलत तरीके से पेश किया गया। लोगों ने इस पोस्टर का जैसा मतलब निकाला है वह मेरे लिए हैरान करने वाला है। मैंने तो अपने मौलिक अधिकारों का सदुपयोग कर रही थी।

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