दिल्ली में पीएम बनाम सीएम

नई दिल्ली

आप की तरफ से फिर अरविन्द केजरीवाल हैं चेहरा, वहीं भाजपा में कोई मुख्यमंत्री उम्मीदवार तय नहीं

दिल्ली विधानसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही दिल्ली का ‘सुल्तान’ कौन की जंग रोचक हो गई है। राज्य के सीएम अरविंद केजरीवाल अपने काम के दम पर तीसरी बार सीएम बनने की उम्मीद कर रहे हैं वहीं, बीजेपी पीएम नरेंद्र मोदी के के करिश्मे के दम पर सामूहिक नेतृत्व के साथ केजरीवाल को चुनौती देने उतरेगी। कांग्रेस भी अपनी ओर से कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है। हालांकि, कांग्रेस के पास शीला दीक्षित जैसा कोई कद्दावर चेहरा नहीं होना उसे नुकसान पहुंचा सकता है।

पिछला करिश्मा दोहरा पाएंगे केजरीवाल?

इंडिया अगेंस्ट करप्शन कैंपेन (2011-12) के बाद आम आदमी पार्टी का गठन अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में हुआ। नवंबर 2012 में बनी पार्टी ने अगले साल ही दिल्ली में हुए चुनावों में 70 में से 28 सीटें जीत लीं। हालांकि, बतौर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का कार्यकाल सिर्फ 49 दिन चला।

2015 में हुए विधानसभा चुनावों में आप ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की और 70 में से 67 सीटों पर जीते। दिल्ली में इतनी बड़ी जीत के साथ सत्ता में वापसी ने अरविंद केजरीवाल को राजनीति के नए हीरो के तौर पर पेश किया। दिल्ली में 7 लोकसभा और तीन राज्यसभा सीट हैं, लेकिन देश की राजनीति पर इसका दूरगामी असर पड़ता है। दिल्ली की राजनीति ने ही पूरे देश में केजरीवाल को बतौर ब्रैंड स्थापित किया है। देश के कई बड़े राज्यों के मुख्यमंत्री की तुलना में केजरीवाल का सोशल मीडिया पर अधिक प्रभाव है। अब सवाल है कि इन चुनावों में अरविंद केजरीवाल फिर से बतौर हीरो वापसी करते हैं या नहीं?

कांग्रेस के लिए सत्ता छीनना नहीं होगा आसान

आप के मुखिया अरविंद केजरीवाल जहां तीसरी बार सत्ता अपने पास बनाए रखने के लिए मैदान में होंगे, वहीं 21 साल से दिल्ली की सत्ता से वनवास झेल रही भाजपा हर हाल में यह सूरत बदलना चाहेगी। पिछले लोकसभा चुनाव में प्रदर्शन में हुए सुधार से उत्साहित कांग्रेस भी वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव में रहे अपने शर्मनाक प्रदर्शन को सुधारने के लिए चुनावी रण में कूदेगी। कुल मिलाकर मुकाबला रोचक होगा, लेकिन चुनावी तैयारी में कांग्रेस से बेहतर दिख रही भाजपा के लिए भी आप से सत्ता छीनना आसान नहीं होगा।

भाजपा ने नहीं उतारा कोई सीएम चेहरा…

दिल्ली विधानसभा चुनाव की तारीख की घोषणा हो गई है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जहां अपने पिछले पांच वर्ष के कामकाज को लेकर जनता के सामने हैं, वहीं भाजपा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भरोसे मैदान में है।

पीएम मोदी बनेंगे बीजेपी के खेवनहार

दिल्ली में पिछले चुनाव नतीजों से सबक लेते हुए बीजेपी ने इस बार मुख्यमंत्री पद के चेहरे का ऐलान नहीं किया है। दिल्ली में इस बार पीएम मोदी की छवि और केंद्र सरकार के कामों के दम पर बीजेपी चुनाव लड़ेगी। पिछले कुछ वक्त से बीजेपी के दिग्गज नेता दिल्ली की सभाओं में केजरीवाल और कांग्रेस को जोरदार तरीके से घेर रहे हैं। चुनाव नतीजों के ऐलान के साथ ही अमित शाह ने ट्वीट किया, ‘मुझे पूरा भरोसा है कि लोकतंत्र के इस महापर्व में लोग उसी सरकार को चुनेंगे जो उनकी आकांक्षाओं को पूरा करता हो। जनता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उन लोगों को हराएगी जो पिछले पांच साल से सिर्फ गुमराह कर रहे हैं।’

उम्मीदवारों की घोषणा करेगी कांग्रेस

दिल्ली में सत्ता के संग्राम की रणभेरी बजते ही कांग्रेस भी अलर्ट मोड पर आ गई है। रणनीति को धार देते हुए पार्टी सप्ताह भर में अपना घोषणा पत्र और उम्मीदवारों की पहली सूची दोनों ही जारी कर देगी। घोषणा पत्र में जहां जनता के सुझाव भी शमिल किए जाएंगे वहीं उम्मीदवारों की पहली सूची में 25 से 30 नाम शामिल हो सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक 70 विधानसभा क्षेत्रों के लिए पार्टी के पास लगभग चार सौ नाम आ चुके हैं। इनमें 75 से 80 दावेदारों ने पार्टी कार्यालय में आवेदन किया है। हर विधानसभा क्षेत्र के लिए तीन-तीन नाम हैं।

35 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है जदयू

दिल्ली की त्रिकोणीय लड़ाई में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सहयोगी जदयू भी मैदान में उतरने की तैयारी में है। इस बाबत बिहार की राजग सरकार में मंत्री और दिल्ली के प्रभारी संजय झा ने बताया कि पार्टी लगभग आधी सीटों पर दमखम के साथ अपने उम्मीदवार उतारेगी। जाहिर तौर पर जदयू की नजर विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर होगी, जहां पूर्वांचल के लोगों की खासी संख्या है। इसके अलावा शुद्ध पेयजल के मुद्दे के साथ पूरी दिल्ली में प्रचार होगा। दरअसल दिल्ली में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर भाजपा और सत्ताधारी आम आदमी पार्टी के बीच ठनी है।

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