इस कंगारू का दिन ऐसे लोगों के गले लग कर शुरू होता है जो उनकी देखभाल करते हैं

विभव देव शुक्ला

बीते कुछ दिन ऑस्ट्रेलिया के लिए बहुत अच्छे नहीं रहे, जंगलों में लगी आग से भारी तबाही हुई। अनुमानित तौर पर पूरे ऑस्ट्रेलिया में लगभग 500 करोड़ जानवरों ने अपनी जान गंवाई और न जाने कितने जानवरों का जंगल पल भर में राख़ हो गया। हालात बहुत बेहतर नहीं हैं पर सुधर ज़रूर रहे हैं। बहुत से लोग इन हालातों से निपटने के लिए आगे भी आ रहे हैं, जिसमें खिलाड़ियों से लेकर फिल्मी सितारे तक शामिल हैं।

गले लग कर कहती है शुक्रिया
लेकिन मदद के इन किस्सों के बीच तमाम ऐसे किस्से भी सामने आए जिनकी शायद ही किसी ने कल्पना की होगी। ऐसा ही एक किस्सा हुआ एक कंगारू की जान बचाने के दौरान। जब हम किसी की मदद करते हैं बदले में वह व्यक्ति हमारा शुक्रिया ज़रूर अदा करता है। लेकिन यहाँ शुक्रिया कोई इंसान नहीं बल्कि ‘अबीगेल’ नाम की कंगारू कहती है। अबी हर उस व्यक्ति के गले लगती है जिसने कंगारुओं को आग से बचाया या कंगारुओं का ध्यान रखता है।

कैसे बनी कंगारुओं की यह सेंचुरी
13 साल की इस कंगारू अबी के तमाम वीडियो भी मौजूद हैं जिसमें वह आग से बचाने वाले तमाम लोगों को गले लग कर शुक्रिया कहती है। कई वीडियो में यहाँ तक देखा जा सकता है कि अबी अपने दिन की शुरुआत ऐसे लोगों से गले लग कर करती है जो ऑस्ट्रेलिया के एलिस स्प्रिंग में मौजूद सेंचुरी में कंगारुओं की देखभाल करते हैं। अबी जब कुछ महीने की थी तभी उसके परिवार के तमाम कंगारुओं की मौत हो गई थी।
जिस सेंचुरी में अबी रहती है उसकी शुरुआत करने वाले क्रिस ब्रोलगा कंगारुओं को लेकर बहुत सजग हैं। उन्होंने इस सेंचुरी की शुरुआत उस दौरान की जब उन्हें पहली बार महसूस हुआ कि जानवरों की देखरेख करने वाला केंद्र वहाँ से 1500 किलोमीटर की दूरी पर स्थित था। यह सेंचुरी कुल 188 एकड़ की जगह में बनी है और पर्यटकों के लिए भी खुली है। अबी यहाँ पिछले 10 साल से रह रही है और उसका यहाँ काम करने वाले हर इंसान से अनोखा संबंध है।

क्यों होती है कंगारुओं के साथ ज़्यादती
साल 2013 के दौरान सेंचुरी में काम करने वाले एक व्यक्ति ने फेसबुक पर लिखा था ‘अबी जब हमारे पास आई थी तब वह लावारिस थी। उस समय अबी की उम्र महज़ 5 महीने थे, उसके शरीर पर तमाम चोटों के निशान थे। ऑस्ट्रेलिया में बड़े पैमाने पर कंगारुओं की तस्करी की जाती है, उनसे मिलने वाला चमड़ा और मीट बहुत कीमती माना जाता है। इनसे बनने वाले उत्पादों की मदद से हर साल 29 मिलियन डॉलर का व्यवसाय होता है।

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