जब हफ्ते में महज़ 4 दिन और दिन के 6 घंटे काम करना होगा तो क्यों कोई इस देश नहीं जाएगा?

विभव देव शुक्ला

सना मरीन हाल ही में फिनलैंड की नई प्रधानमंत्री चुन कर आई हैं। जनता किसी नेता को चुन कर ऐसी अहम ज़िम्मेदारी देती है तो बदले में आशा करती है कि नेता बेहतर नतीजे देने में कामयाब हो। सना तो फिर भी महज़ 34 साल की हैं। युवा होने के नाते लोगों की उम्मीदें दोगुनी हैं इन उम्मीदों पर भले बहस हो सकती है। लेकिन फिलहाल सना ने फिनलैंड के लोगों के लिए एक ऐसा फैसला लिया है जिससे लोग काफी खुश हैं।

दिन के महज़ 6 घंटे काम
फ़िनलैंड की सरकार ने एक आदेश जारी किया है जिसके मुताबिक 24 घंटे में महज़ 6 घंटे काम करना होगा साथ ही एक हफ्ते में कुल 3 आधिकारिक छुट्टियाँ होंगी। यह आदेश जारी करने के बाद सना ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा इस फैसले से आम लोगों को काफी मदद मिलेगी। लोग अपने परिवार को समय दे पाएंगे, अपनी पसंद की चीज़ें कर पाएंगे, अपनी दिनचर्या को बेहतर कर पाएंगे, अपने रीति रिवाज़ो के करीब आ पाएंगे। कामकाज़ी ज़िंदगी के यह एक बेहतर कदम साबित होगा।

स्वीडन में भी ऐसा ही होता है
आम तौर पर फ़िनलैंड में लोग हफ्ते में 5 दिन और 8 घंटों के लिए काम करते हैं। जबकि उनके पड़ोसी देश स्वीडन में एक दिन के दौरान महज़ 5 घंटे काम करने की नीति बनाई गई है। जिसके बाद वहाँ के लोगों में तमाम ज़रूरी बदलाव नज़र आए, इसके अलावा जापान और इंग्लैंड के ऐसे तमाम समूह थे जिन्होंने हफ्ते में 3 दिन की छुट्टी का नियम बनाया। उन समूहों में भी इस फैसले के बाद कर्मचारियों में काफी सकारात्मक बदलाव नज़र आए।

देश की सबसे युवा महिला प्रधानमंत्री
सना फ़िनलैंड की सबसे युवा महिला प्रधानमंत्री हैं और केंद्र की वामपंथी सरकार की अगुवाई करती हैं। इन 5 दलों के शीर्ष पर औरतें मौजूद हैं। सना ने एक समाचार समूह से बात करते हुए कहा था मैंने कभी अपनी उम्र और पहचान पर ध्यान नहीं दिया। मुझे सिर्फ इस बात से फर्क पड़ता था कि कैसे मुझे राजनीति में प्रेरणा मिलती रहे।
अपने राजनीतिक दल सोशलिस्ट डेमोक्रेटिक पार्टी के 120वीं सालगिरह पर सना ने कहा था आखिर क्यों हम लोगों के काम करने का समय घटा नहीं सकते हैं? इससे लोगों को खुद के लिए समय मिलेगा, खुद के परिवार के लिए समय मिलेगा, ज़िंदगी के तमाम आयाम तलाशने का मौका मिलेगा और संस्कृति को बेहतर तरीके से समझ पाएंगे।

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