मंदिरों से निकले नारियल की बर्फी दूर करेगी बच्चों का कुपोषण

विनोद शर्मा | इंदौर

चढ़ावे के नारियल की बर्फी कुपोषित बच्चों को बांटने का अभियान अब पूरे संभाग में

कुपोषण से जूझ रहे संभाग में कच्चों को पोषण देने के मकसद से संभागायुक्त आकाश त्रिपाठी ने कुछ मंदिरों में चढ़ने वाले नारियल से बरफी और लड्‌डू बनवाकर बच्चों को बंटवाने की पहल शुरू की है। ये पहल कामयाब रही। बच्चे इसे बड़े शौक से खा रहे हैं, उम्मीद है उनकी सेहत पर भी इसका सकारात्मक प्रभाव दिखेगा। शुरुआत इंदौर के खजराना और रणजीत हनुमान मंदिर से हुई थी, लेकिन अब बड़वानी व अन्य जिलों में भी त्रिपाठी की इस पहल पर अमल शुरू कर दिया है।

कुछ समय पहले संभागायुक्त ने खजराना गणेश मंदिर और रणजीत हनुमान मंदिर का दौरा किया था। उन्होंने देखा कि भगवान के चरणों में सैकड़ों नारियल प्रतिदिन चढ़ते हैं। फिर ये वापस दुकान पर जाते हैं। नारियल में न्यूट्रिशियन वेल्यू ज्यादा रहती है, इसीलिए त्रिपाठी ने नारियल इकट्‌ठा करके उनसे बरफी-लड्‌डू बनवाकर कुपोषित बच्चों तक पहुंचाने के निर्देश दिए थे। अब इस व्यवस्था को शहर के अन्य मंदिरों में भी लागू करने की तैयारी है।

बड़वानी के चार मंदिर भी जुड़े : त्रिपाठी के कुपोषण मुक्त अभियान से 30 दिसंबर को बड़वानी जिले के चार मंदिर भी जुड़ गए हैं। वहां भी नारियल से बने लड्‌डू और बरफी बच्चों को मिलने लगे हैं। कलेक्टर कॉन्फ्रेंस में त्रिपाठी ने संभाग के अन्य जिलों में भी इस व्यवस्था को लागू करने के निर्देश दिए। खंडवा कलेक्टर ने भी इसे जल्द अमल में लाने का दावा किया।

नारियल के फायदे : अतिकुपोषित बच्चों को नारियल, गुड़ या शकर की बरफी बनाकर देते हैं तो उससे पोषण अच्छा मिलता है। नारियल में मौजूद इलेक्ट्रोलाइट तत्व शरीर को हाइड्रेट रखते हैं, ताकि मांसपेशियां और तंत्रिकाएं ठीक से काम कर सकें। त्वचा में ड्राइनेस को कम करने या खुजली और दाने होने की स्थिति में भी यह फायदेमंद साबित होता है।

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