7 साल की उम्र में गंवाई थी आँखों की रोशनी, अब बनेंगी उड़ीसा की पहली नेत्रहीन प्रशासनिक अधिकारी

विभव देव शुक्ला

हमारे सामने अक्सर ऐसी कहानियाँ होती हैं जिन पर भरोसा करना तक मुश्किल होता है। जिनके बारे में सुन कर एक बड़ी आबादी सीखती और समझती है, नज़रिया तैयार करती है। ऐसी कहानियाँ समाज के किसी छोटे कोने से शुरू होकर दुनिया के सबसे ऊंचे पायदान तक जाती हैं। उड़ीसा की तपस्विनी दास की नज़रें नहीं है, वह देख नहीं सकती हैं। इसके बावजूद उन्होंने उड़ीसा की लोक सेवा आयोग की परीक्षा में अपनी जगह बनाई।

5 लाख लोगों में 161वां स्थान
तमाम तरह के मुश्किल हालातों का सामना करते हुए तपस्विनी दास ने उड़ीसा की लोक सेवा आयोग परीक्षाओं में 161वां स्थान हासिल किया। इस बार परीक्षा में कुल 5 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए थे जिसमें से महज़ 218 लोग उस परीक्षा में सफल हुए। तपस्विनी मूल रूप से उड़ीसा की रहने वाली हैं और एक लापरवाही के चलते उनकी आँखों की रोशनी चली गई थी।
जब तपस्विनी कक्षा 2 में पढ़ती थीं तब उनकी आँखों की सर्जरी होनी थी। डॉक्टरों की लापरवाही के चलते सर्जरी के दौरान उनकी आँखों की रोशनी लगभग जा चुकी थी। लेकिन एक समय के बाद उन्हें इन बातों का कोई मलाल नहीं रह गया। उन्होंने न तो इस बात का असर खुद पर पड़ने दिया और न ही कभी अपने सपनों से समझौता किया।

लापरवाही के चलते गई थी रोशनी
समाचार समूह एएनआई से बात करते हुए तपस्विनी ने अपनी ज़िंदगी से जुड़ी कई अहम बातें साझा कीं। उन्होंने कहा जब मैं 7 साल की थी तब मेरे सिर में दर्द शुरू हुआ और मुझे धुंधला नज़र आने लगा। फिर मेरे घर वाले मुझे डॉक्टर के पास लेकर गए और डॉक्टर ने बताया कि मेरी बाईं आँख की रोशनी पूरी तरह जा चुकी है और दाईं आँख की आधी रोशनी जा चुकी है। फिर मेरी दाईं आँख की सर्जरी शुरू हुई और उसके अंत में मेरी आँख की रोशनी पूरी तरह जा चुकी थी।

प्रदेश की पहली नेत्रहीन प्रशासनिक अधिकारी
इसके बाद तपस्विनी ने कहा मैं इसे सफलता की तरह नहीं देखती बल्कि जीत की तरह देखती हूँ। यह सफलता की राह में पहले कदम जैसा है, इसके आगे भी मेरे पास साबित करने के बहुत कुछ है। मेरे लिए यह शानदार अनुभव है, मुझे वाकई बहुत अच्छा लग रहा है। उड़ीसा की दिव्यांग राज्य आयुक्त सुलोचना दास ने तपस्विनी को इस सफलता के लिए बधाइयाँ दी हैं। उनका कहना है कि यह तपस्विनी जैसे बहुत से लोगों के लिए सीख होगी। तस्विनी राज्य की पहली नेत्रहीन प्रशासनिक अधिकारी होंगी।

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