गौरी लंकेश की हत्या का मुख्य आरोपी आख़िरकार पकड़ा गया

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर। जब गौरी लंकेश की हत्या हुई तो पूरा देश सदमे में था लेकिन इसी बीच एक बात कही जा रही थी कि किसी व्यक्ति विशेष को मारा जा सकता है जो मुखर है लेकिन विचारों को कभी ख़त्म नहीं किया जा सकता है। वो अपने पनपने का रास्ता खोज ही लेते हैं।

इस घटना को बीते लगभग 3 साल बीत चुके हैं। इसी क्रम में गौरी लंकेश के 18 वें आरोपी को पकड़ लिया गया है। पत्रकार गौरी लंकेश हत्याकांड की जांच कर रही एसआईटी टीम ने कल फरार आरोपी रुशिकेश देवदीकर को गिरफ्तार कर लिया। उसे झारखंड के धनबाद जिले से गिरफ्तार किया गया था।

वाम रूझान वाली पत्रकार लंकेश की पांच सितंबर 2017 को उनके घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उनकी हत्या का संदेह एक ऐसे समूह के सदस्य पर गया था जो दक्षिणपंथी विचारधारा से प्रेरित था।

झारखंड के धनबाद से गिरफ्तार हुआ ऋषिकेश

जांचकर्ताओं ने कहा कि समूह ने ऐसे लोगों की सूची तैयार की थी जिनकी वह हत्या करना चाहता था और उस सूची में रंगकर्मी गिरिश कर्नाड और तर्कवादी के.एस. भगवान का भी नाम था। एसआईटी को पता चला कि लंकेश की हत्या की साजिश उसी दक्षिणपंथी समूह के सदस्यों ने रची जिन पर तर्कवादी एम.एम.कलबुर्गी की हत्या का आरोप है।

मुरली औरंगाबाद का निवासी है

44 साल के ऋषिकेश देवडीकर उर्फ मुरली औरंगाबाद का रहने वाला है। यह आरोपी मुख्य रूप से हत्या की साजिश में शामिल था। जिसे झारखंड के धनबाद जिले के कटरास में गिरफ्तार किया गया। फिलहाल हत्याकांड से जुड़े सबूतों की तलाश में उसके घर की तलाशी ली जा रही है।

नाम बदलकर छिपा था

पुलिस से बचने के लिए आरोपी ऋषिकेश देवडीकर उर्फ मुरली धनबाद के कतरास इलाके में एक पेट्रोल पंप पर पहचान छुपाकर रह रहा था। गिरफ्तार किए गए कुछ लोगों के कथित रूप से सनातन संस्था और उसके संबद्ध संगठन हिंदू जनजागृति समिति से संबंध हैं। सबूतों की तलाश में उसके घर की तलाशी ली जा रही है। उसे कल न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा। वह मुख्य रूप से गौरी लंकेश की हत्या की साजिश में शामिल था।

सम्मानित भी की जा चुकी है एसआईटी टीम

गौरी लंकेश मर्डर केस की जांच करने वाली टीम को बेहतरीन काम के लिए केंद्र सरकार ने पिछले साल मेडल प्रदान किया था। बेंगलुरु में जांच अधिकारी (आईपीएस) एमएन अनुचेथ, डिप्टी एसपी रंगप्पा और इंस्पेक्टर राजा को केंद्र सरकार ने उनकी जांच के लिए ‘केंद्रीय गृह मंत्री पदक’ से सम्मानित किया गया था।

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