किसानों की सुसाइड लिस्ट से लंबी भी है बेरोजग़ारों के मौत का आंकड़ा

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर। आर्थिक मंदी और देश में घटते रोजगार के अवसरों के बीच सरकार की एक रिपोर्ट से पूरे देश में हड़कंप मच गया है। इस रिपोर्ट को पढ़ने के बाद भी अगर आप सरकार से सवाल नहीं पूछने की हिम्मत करेंगे तो कब आप भी इस रिपोर्ट में शामिल हो जायेंगे खुद आपको पता नहीं चलेगा।

दरअसल नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो ने बेरोजगारी को लेकर चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। एनसीआरबी डाटा के मुताबिक देश में बेरोजगारी की वजह से साल 2018 में औसतन 35 लोगों ने रोजाना खुदकुशी की है। इस तरह से हर 2 घंटे में लगभग 3 बेरोजगार खुदकुशी कर रहे हैं।

इस की रिपोर्ट के विस्तार से अध्ययन करने पर इस बात का खुलासा होता है कि 2018 में खुदकुशी करने वाले सबसे अधिक दिहाड़ी मजदूर शामिल थे। रिपोर्ट के मुताबिक आत्महत्या करने वालों में पांच से एक दिहाड़ी मजदूर शामिल था।

देश में बढ़ रही बेरोज़गारी अब जानलेवा बन चुकी है

एनसीआरबी द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसारी बेकारी और बेरोजगारी से तंग आकर खुदकुशी करने वालों की संख्या किसानों की आत्महत्या की तादाद से ज्यादा है। साल 2018 में 12 हजार 936 लोगों ने बेरोजगारी से तंग आकर खुदकुशी की थी। जबकि इसी अवधि में खेती-किसानी से जुड़े 10 हजार 349 लोगों ने आत्महत्या की थी।

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो गृह मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली संस्था है और ये संस्था देश भर में अपराध से जुड़े आंकड़े और ट्रेंड जारी करती है। एनसीआरबी के ताजा आंकड़े बताते हैं कि 2018 में देश में खुदकुशी के मामलों में 3.6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। 2018 में आत्महत्या के 1 लाख 34 हजार 516 मामले दर्ज किए गए थे, जबकि 2017 में 1 लाख 29 हजार 887 लोगों ने खुदकुशी की थी।

सुसाइड लिस्ट में केरल का नाम सबसे ऊपर

केरल शिक्षा के मामले में भी अव्वल है। जब इतने पढ़े-लिखे राज्य को बेरोज़गारी के कारण मौत का सामना करना पड़ रहा है बाकी राज्यों का हाल आप सोच ही सकते हैं।

बेरोजगारों द्वारा खुदकुशी के जारी किए गए सरकारी आंकड़ों से कई तथ्यों का पता चलता है। इस कैटेगरी में सुसाइड करने वाले 82 फीसदी लोग पुरुष हैं। खुदकुशी के ज्यादा मामले केरल (1585) तमिलनाडु (1579), महाराष्ट्र (1260) कर्नाटक (1094) और उत्तर प्रदेश (902) में दर्ज किए गए हैं।

आंकड़ों के मुताबिक साल 2018 में 5763 किसानों और 4586 खेतिहर मजदूरों ने खुदकुशी की है। अगर 2018 की बात करें तो किसानों की खुदकुशी में 5457 किसान पुरुष थे, जबकि 306 महिलाएं थी। खेतिहर मजदूरों की बात करें तो खुदकुशी करने वालों में 4071 पुरुष थे, जबकि महिलाओं की संख्या 515 थी।

किसानों की खुदकुशी के सबसे ज्यादा मामले महाराष्ट्र में दर्ज किए गए। कुल खुदकुशी के 34.7 फीसदी मामले महाराष्ट्र में, 23.2 फीसदी कर्नाटक में, 8.8 फीसदी तेलंगाना में, 6.4 फीसदी आंध्र प्रदेश में और 6.3 फीसदी मध्य प्रदेश में दर्ज किए गये।

हर 2 घंटे में 3 बेरोजगार कर रहे खुदकुशी

एनसीआरबी आंकड़ों का विस्तार से अध्ययन करने पर पता चलता है कि 2018 में रोजाना लगभग 35 लोगों ने, 2017 में लगभग 34 लोगों ने बेरोजगारी से तंग आकर खुदकुशी की। 2016 में ये आंकड़ा 30 था।

क्या बताते हैं 2017 के आंकड़े

2017 में 12 हजार 241 लोगों ने बेरोजगारी से परेशान होकर खुदकुशी की थी, जबकि खेती-किसानी से जुड़े 10 हजार 655 लोगों ने आत्महत्या की। 2016 में बेरोजगारों के मुकाबले किसानों ने ज्यादा खुदकुशी की थी। एनसीआरबी आंकड़ों के मुताबिक 2016 में 11 हजार 379 किसानों-खेतिहर मजदूरों ने अपनी जान दे दी, जबकि इसी अवधि में 11,173 बेरोजगारों ने खुदकुशी की थी। हालांकि इन आंकड़ों के बीच अंतर बहुत कम था।

2015 में नौकरी और कमाई के साधनों से दूर रहे 10912 लोगों ने खुदकुशी की, जबकि इसी अवधि में किसानों के आत्महत्या के 12602 मामले दर्ज किए गए थे।

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