पाकिस्तानी बार एसोसिएशन में प्रस्ताव – गैर मुस्लिम नहीं लड़ेंगे चुनाव, बाकी देंगे इस्लाम के नाम हलफ़नामा

विभव देव शुक्ला

देश में नागरिकता संशोधन अधिनियम को लेकर लंबी बहस छिड़ी और देश के इतिहास का एक बड़ा विरोध प्रदर्शन हुआ। लेकिन इस अधिनियम का दूसरा पहलू है जो हमारे पड़ोसी देशों पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में मौजूद गैर मुस्लिमों को भारत की नागरिकता देने की बात करता है। अधिनियम का वही पहलू एक बार फिर से चर्चा में है, पाकिस्तान के एक अधिवक्ता संघ ने ऐसा फैसला लिया है जो वहाँ के गैर मुस्लिमों की मौजूदगी को सिरे से खारिज करता है।

इस्लाम में भरोसा जताने के लिए हलफ़नामा
पाकिस्तान के मुल्तान बार एसोसिएशन ने एक प्रस्ताव पारित किया है जिसके बाद पाकिस्तान के गैर मुस्लिम और अहमादिस बार एसोसिएशन का चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। यह प्रस्ताव मुल्तान बार एसोसिएशन के वकीलों ने पेश किया था। इस प्रस्ताव में यह भी बताया गया कि जो वकील चुनाव लड़ना चाहते हैं उन्हें इस्लाम पर अपना भरोसा साबित करने के लिए एक हलफ़नामा दायर करना होगा।
ऐसा न करने वाला कोई भी वकील चुनाव लड़ने के योग्य नहीं माना जाएगा। यह आदेश उस दौरान आया है जब दुनिया के तमाम देश पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे व्यवहार की आलोचना कर रहे हैं। कुछ ही महीनों पहले इमरान खान के राजनीति दल, तहरीक–ए–इंसाफ के पूर्व नेता बलदेव कुमार का बयान आया था। बयान में बलदेव ने बेहद साफ तौर पर देश के हिन्दू और सिक्ख समुदाय के लोगों को खतरा बताया था।

भारत सरकार दखल दे
बलदेव का कहना था कि ‘अल्पसंख्यकों का छोड़िए, पाकिस्तान में खुद मुस्लिम सुरक्षित नहीं हैं’। पूरी पाकिस्तान की कौम तमाम तरह की परेशानियाँ झेल रही है, आम लोग हर तरह से परेशान हैं। इसके अलावा बलदेव का कहना है कि भारत सरकार को ऐसे लोगों की मदद करनी होगी तभी उनके हालात सुधर सकते हैं।
आखिर में बलदेव ने कहा कि भारत सरकार को जल्द से जल्द यहाँ से हिन्दू और सिक्ख समुदाय के लिए राहत पैकेज निकालना चाहिए। जिससे दोनों समुदाय के लोग भारत आ सकें, क्योंकि पूरे पाकिस्तान में दोनों समुदाय के लोगों के साथ बहुत ज़्यादती हो रही है।

दो नाबालिग लड़कियों का जबरन निकाह
इसके अलावा कुछ दिनों पहले भी एक वीडियो जारी हुआ था। वीडियो में लड़की का नाम आएशा बताया जा रहा था और एक मौलवी उस लड़की का जबरन निकाह करवा रहा था। इसी साल के अप्रैल महीने में दो हिन्दू बहनों रीना और रवीना को जबरन इस्लाम धर्म कबूल कराने की घटना सामने आई थी।
यहाँ तक कि जब दोनों लड़कियों का जबरदस्ती निकाह कराया गया तब दोनों ही लड़कियाँ नाबालिग थीं। पाकिस्तान की एक मानवाधिकार संस्था के मुताबिक ज़्यादातर अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जा रहा है। जिसमें अधिकतर हिन्दू, ईसाई और सिक्ख समुदाय के लोग हैं।

पिछले 4 सालों में 1100 से अधिक मामले
पिछड़ी जाति से आने वाले परिवारों की लड़कियों का जबरन धर्मांतरण कराने के मामले भी सामने आए हैं। इस मुद्दे पर कुछ आंकड़े जारी करते हुए पाकिस्तान की मानवाधिकार संस्था ने बताया कि बीते 4 सालों में 1100 से अधिक धर्म परिवर्तन के मामले सामने आए हैं। इसके अलावा एक और ताज्जुब वाली बात यह सामने आई कि तमाम लड़कियाँ लापता भी हुई हैं।
बलदेव ने खैबर पख्तून खवा के हिन्दू और सिक्खों के अधिकारों के लिए बहुत काम किया है। उन्होंने आखिर में यह भी कहा कि हमें इमरान खान से बहुत उम्मीदें थीं लेकिन हालात कुछ इस कदर हो चुके हैं कि हर इंसान निराश है।

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