विरोध के दौर में ईरान की इकलौती महिला खिलाड़ी भी देश छोड़ने को हुई मजबूर

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर। ये इस सदी का सबसे ज़्यादा बुरा वक़्त चल रहा है क्योंकि केवल भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया भर के कई हिस्सों में लोग अपने तरीके और अपनी मांगों को लेकर जागरूक हो रहे हैं तथा अपना विरोध दर्ज़ करवा रहे हैं। इसी क्रम में ईरान जैसे देश में भी विरोध हो रहा है।

ईरान की इकलौती महिला ओलंपिक पदक विजेता किमिया अलीज़ादेह ने अपने देश को छोड़ने का फ़ैसला लिया है। अपने इस फैसले को लेकर 21 साल की किमिया ने इस बारे में सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा है। जिसके मुताबिक़ वह ईरान में, ‘पाखंड, झूठ, अन्याय और चापलूसी’ का हिस्सा नहीं बनाना चाहती हैं।

उन्होंने बताया कि ऐसे माहौल में उनका रहना दूभर हो गया था। साथ ही वो ऐसे सिस्टम का हिस्सा नहीं बनना चाहतीं। जहां महिलाओं का अपमान होता हो। उन्होंने खुद को लाखों पीड़ित महिलाओं में से एक बताया।

किमिया ने रियो ओलिंपिक में ताइक्वांडो में ब्रॉन्ज मेडल जीता था

किमिया ने 2016 के रियो ओलिंपिक में ताइक्वांडो में ब्रॉन्ज मेडल जीता था। वे देश के लिए इकलौता ओलिंपिक मेडल जीतने वाली खिलाड़ी हैं। अपनी पोस्ट में इस खिलाड़ी ने ईरानी अफसरों पर आरोप लगाए कि उन्होंने मेरी कामयाबी को अपने प्रचार के लिए इस्तेमाल किया। इस ओलिंपियन ने ईरान छोड़ने का फैसला तब लिया, जब देश में यूक्रेन के विमान को गलती से मार गिराने के कारण भारी विरोध प्रदर्शन हो रहा है।

कई ईरानी अफसरों द्वारा अपमानित की गयीं

किमिया ने आगे लिखा, “मैं सालों तक देश के लिए खेलती रही। अधिकारियों का हर आदेश माना। उन्होंने जो पहनने के लिए कहा, वही पहना। लेकिन हम उनके लिए अहमियत नहीं रखते। केवल इस्तेमाल होने वाले औजार की तरह हैं। सरकार मेरी कामयाबी को राजनीतिक तौर पर भुनाती रही।” अलीजादेह ने इससे भी इनकार किया कि उन्हें यूरोप से कोई आकर्षक प्रस्ताव मिला है और न ही उन्होंने यह बताया है कि वह कहां जाएंगी।

बीते गुरुवार ईरान की समाचार एजेंसी इसना की रिपोर्ट में कहा गया अलीज़ादेह को 2020 के टोक्यो ओलंपिक में हिस्सा लेने की उम्मीद तो है, लेकिन बतौर ईरान की नागरिक बन कर नहीं। लेकिन ये साफ कर दिया कि वह जहां भी जाएंगी, वहां ईरान की बेटी बनकर रहेंगी।

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