प्रोटेस्ट के बीच शाहीन बाग़ के बच्चों का ‘रीड फॉर रिवॉल्यूशन’

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर। शाहीन बाग़ अब केवल एक जगह का नाम भर नहीं रह गया है, अब ये जगह इतिहास के एक पन्ने का हिस्सा बन गयी है। बीते रविवार को यहां का नज़ारा अपने आप में अद्धभुत था लगभग 1 लाख से भी ज़्यादा लोगों का जमावड़ा हुआ था, सीएए प्रोटेस्ट को लेकर लेकिन इस प्रोटेस्ट के बीच एक रोचक नज़ारा देखने को मिला बच्चों का।

बच्चे भी इस प्रोटेस्ट में अपनी भागीदारी दिखाते हुए नज़र आये। इस प्रोटेस्ट में जहां कुछ लोगों ने राजनैतिक बहस में अपने दोस्त यारों को खोया है। वहीं शाहीन बाग के इन बच्चों के इस प्रोटेस्ट के दौरान नए दोस्त बने हैं।

बच्चों के द्वारा बनाये गए पेंटिंग्स। फ़ोटो क्रेडिट- हिमानी

देश की राजधानी दिल्ली का शाहीन बाग इलाका नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ करीब एक महीने से जारी प्रदर्शन के लिए देशभर में चर्चा में है। शाहीन बाग में एकता, हिम्मत और हौसले के साथ 24 घंटे जारी प्रदर्शन में अनोखा नजारा देखने को मिल रहा है।

एक महीने की बच्ची को गोद में लिए बैठी महिला से लेकर 90 साल से ज्यादा उम्र की महिलाएं तक जज्बे के साथ प्रदर्शन में डटी हैं तो वहीं छोटे बच्चों के लिए रीड फॉर रिवॉल्यूशन नाम से एक लाइब्रेरी जैसी जगह तैयार की गई है, जहां छोटे बच्चे पेंटिंग करते हैं और पोस्टर बनाते हैं।


फ़ोटो क्रेडिट- हिमानी

ओसामा ज़ाकिर, शाहबाज़ और नईम सरमद तथा इनके साथ और कुछ लोग मिलकर इस खुबसूरत पहल की शुरुआत की है। नईम से बात करने पर वो बताते हैं कि हम बच्चों को केवल रंग का ज्ञान देते हैं जैसे कुछ बच्चों को समझ नहीं आता कि फलां पोस्टर पर कौन सा रंग इस्तेमाल होना चाहिए। पोस्टर का आइडिया, स्लोगन क्या लिखना है ये बच्चों का फैसला होता है।

ये गैलरी पढ़ाई-लिखाई के लिए बनाई गयी है। यूनिवर्सिटी से आए छात्र भी यहां बैठकर अपनी पढ़ाई कर सकते हैं, जिससे प्रदर्शन के साथ-साथ पढ़ाई पर ज्यादा असर ना पड़े। रीड फॉर रिवॉल्यूशन के जरिए जागरुकता फ़ैलाने का काम किया जा रहा है। क्योंकि जब तक किसी को अपने राइट्स और अधिकारों के बारे में पता ना हो, तब तक वो अपने हक के लिए आवाज नहीं उठा सकता।

फ़ोटो क्रेडिट- नईम सरमद

बच्चे जो भी पेंटिंग बनाते हैं उन पेंटिंग्स और पोस्टरों को प्रदर्शनस्थल पर लगाया जा रहा है। कुछ पेंटिंग्स और पोस्टर में प्रदर्शन में शामिल महिलाओं के संघर्ष को भी दिखाया गया है।

नईम इस पहल के बारे में बताते हैं, “यहां अलग-अलग उम्र के बच्चे आते हैं कुछ तो केवल 5 साल के भी हैं तथा कुछ बच्चे 7वीं में पढ़ने वाले। इन बच्चों के माता-पिता काफ़ी खुश हैं इस पहल से वो बोलते हैं कि यहां हमारा बच्चा रोज़ कुछ ना कुछ सीखता है बजाए केवल नारे लगाने के।”

शाहीन बाग में बीते 15 दिसंबर से सीएए के खिलाफ धरना प्रदर्शन जारी है। जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं की भागेदारी है। महिलाओं ने आवाज बुलंद कर रखी है कि जब तक सीएए वापस नहीं होगा तब तक सड़क से नहीं उठेंगे। शाहीन बाग में सड़कों और दीवारों पर नारों के साथ सीएए के विरोध को दर्शाया गया है। इसके अलावा शाहीन बाग बस स्टैंड के पास इंडिया गेट का एक मॉडल भी बनाया गया है।

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