अंडरवर्ड और कमाठीपुरा के बीच रिश्ते की कहानी है गंगूबाई काठियावाड़ी

विभव देव शुक्ला

फिल्मी दुनिया के पन्नों तले सैकड़ों कहानियाँ दबी पड़ी हैं, जिनसे आज तक पर्दा नहीं उठा है। महज़ चंद मुट्ठी भर लोग ही ऐसी कहानियों से राबता रखते हैं लेकिन ऐसी कहानियों को देखना और समझना सभी चाहते हैं। इन कहानियों की ज़मीन में सबसे मज़बूत हिस्सा होता है सितारों का, सितारे ही ऐसी कहानियों को रंग देते हैं। सितारों के सहारे एक कहानी गुज़रे ज़माने के पुराने पन्ने पर और गाढ़ी होती है। ऐसी ही एक कहानी का किरदार है गंगूबाई काठियावाड़ी।

माथे पर बिंदी और टेबल पर बंदूक
तमाम लोग इस नाम को जानते हैं, नाम से जुड़ी बातें भी जानते हैं लेकिन फिल्म आने के बाद बड़ी आबादी के लिए इस नाम के बारे में जान पाना आसान होगा। गंगूबाई पर फिल्म आ रही है और फिल्म में गंगूबाई बनी हैं आलिया भट्ट। फिल्म की चर्चा पिछले कई महीनों से थी लेकिन बीते दिन फिल्म का पहला लुक जारी हुआ। इसमें आलिया भट्ट के लुक को किसी भी तरह के ग्लैमर से दूर रखा गया है।
फिल्म के दो पोस्टर जारी हुए हैं, पहले पोस्टर में आलिया एक साधारण लड़की की तरह नज़र आ रही है। सादा पहनावा, दो चोटी, माथे पर बिंदी, हाथों में चूड़ियां, टेबल पर हाथ के सहारे टिका हुआ चेहरा और टेबल पर रखी हुई बंदूक। वहीं दूसरे पोस्टर में आलिया के माथे पर एक बड़ी बिंदी है, नाक में नथ और गले से चिपका हुआ एक भारी हार। फर्स्ट लुक के ज़रिये लोगों के लिए फिल्म में गंगूबाई के किरदार का अंदाज़ा लगा पाना आसान हो गया।

60 का दशक और गंगूबाई का नाम
फिल्म के बारे में बाहर आई हर ख़बर से लेकर फर्स्ट लुक तक, दर्शकों में फिल्म को लेकर उम्मीदें बहुत हैं। लेकिन इसके बावजूद गंगुबाई के बारे में ऐसी तमाम बातें हैं जो बतौर दर्शक बेशक हमें जाननी चाहिए। 60 के दशक में मुम्बई की बड़ी आबादी गंगूबाई का नाम बखूबी जानती थी, गंगूबाई के बारे में कहा जाता है कि धंधे में होने के बावजूद उसूलों से समझौता नहीं किया। कभी किसी लड़की को उसकी मर्ज़ी के खिलाफ अपने कोठे में शामिल नहीं किया।
60 का दशक खत्म होते-होते देश के कई बड़े शहरों में गंगूबाई के कोठे थे। गंगुबाई ने एक समय में खुद से तमाम वेश्याओं की मदद की और हर तरह से की, लड़ना हुआ तो लड़ी और रुपए देने की बात आई तो रुपए भी दिए। गंगूबाई का गुजरात से काठियावाड़ से मुम्बई के कमाठीपुरा तक का सफर भी बड़ा पेचीदा रहा। गंगूबाई का असली नाम गंगा हरजीवनदास काठियावाड़ी था। महज़ 16 साल की उम्र में अपने पिता के एजाउंटेंट से शादी रचा ली।

पति ने चंद रुपयों में बेच दिया
अंत में अपने पति के साथ मुम्बई भाग कर आ गई। शादी रचा कर मुम्बई तक का सफर पूरा करने के पीछे दो बड़ी वजहें थीं, पहला गंगूबाई को अपने पिता के एकाउंटेंट से इश्क था। दूसरा गंगूबाई का सपना था कि वह फिल्मों की अदाकारा बने। लेकिन सारे सपने धरे के धरे रह गए जब पति ने गंगूबाई को 500 रुपए में बेच दिया। ज़िन्दगी में कोई उम्मीद और कोई चारा न बचने के बाद गंगूबाई को आखिरकार वेश्यावृत्ति में आना ही पड़ा। मुम्बई के कमाठीपुरा में गंगूबाई ने अपने लिए ठिकाना तलाशा और वहीं से उसकी ज़िन्दगी धंधे में तब्दील हो गई।

ज़रूरत पड़ने पर लड़कियों की मदद
धीरे धीरे गंगूबाई को तमाम ऐसे ग्राहक मिले जिनका सीधे तौर पर अंडरवर्ड से लेना-देना था। समय के साथ गंगूबाई की जान-पहचान नेताओं से लेकर गैंगस्टर्स तक हो गई नतीजतन गंगूबाई ने खुद का धंधा शुरू किया। लोगों के लिए ताज्जुब की बात यह थी कि गंगूबाई ने कभी किसी लड़की को उसकी मर्ज़ी के खिलाफ अपने कोठे में शामिल नहीं किया। ज़रूरत पड़ने पर अपने साथ मौजूद हर लड़की की मदद भी की।
इन वजहों के चलते पूरी मुम्बई में कोई गंगूबाई के खिलाफ बोलने की जुर्रत नहीं करता था। आखिर गंगूबाई ने हर तरह के लोगों से घिरे होने के बावजूद लड़कियों की भरपूर मदद की और मदद के दौरान हर ख़तरा भी उठाया। करीम लाला की गैंग के एक सदस्य ने गंगूबाई के साथ ज़्यादती की, जिसके बाद गंगूबाई ने करीम लाला से मुलाक़ात की। करीम लाला का भरोसा जीता और अंत में राखी बांध कर भाई बनाया।

पठानों के गॉडफादर से रिश्ता
60 से लेकर 70 के दशक तक मुम्बई में करीम लाला का नाम चलता था। करीम लाला को मायानगरी के पठानों का गॉडगाडर कहा जाता था, हाजी मस्तान और वरदराजन मुदलियार समेत उस दौर के परम्परागत डॉन में से एक। ऐसा कहा जाता है कि पोश्तो भाषी पठान करीम लाला 1920 के आस-पास मुम्बई आए थे। ख़बरों के मुताबिक फिल्म में अजय देवगन यह किरदार निभा सकते हैं।
पहले इस फिल्म का नाम हीरामण्डी रखा जाने वाला था लेकिन अंत में इसे गंगूबाई के नाम पर रखा गया। फिल्म पूरी तरह संजय लीला भंसाली और आलिया भट्ट पर टिकी हुई है और फिल्म से जुड़ी जिस तरह की ख़बरें अभी तक सामने आई हैं उसके बाद दर्शकों की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं। फिल्म इस साल सितंबर महीने की 11 तारीख़ को रिलीज़ होगी। देखने लायक होगा कि अंडरवर्ड और गंगूबाई के बीच बने रिश्ते को यह फिल्मी पर्दे पर कितना ज़िन्दा कर पाती है।

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