कभी 5 करोड़ की माला तो कभी चाँद पर ज़मीन का ऐलान, कुछ यूं होता है मायावती का जन्मदिन

विभव देव शुक्ला

उत्तर प्रदेश की राजनीति में अच्छा भला दखल रखने वाली मायावती आज 64 साल की हो गईं। बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती अभी तक कुल चार बार प्रदेश की कमान संभाल चुकी हैं। भारतीय राजनीति में दलितों से जुड़े मुद्दों पर जम कर बहस करने वाली मायावती को भारत के पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव लोकतन्त्र का चमत्कार मानते थे। शायद यही कारण था कि काशीराम को मायावती में दलित राजनीति का अगुवा नज़र आया।

केक के लिए मची भगदड़
इसके अलावा भी ऐसी तमाम बातें हैं जिनके चलते मायावती सुर्खियों में बनी रहती हैं। बसपा सुप्रीमो का जन्मदिन एक ऐसा ही कारण है जिसके चलते मायावती ख़बरों की वजह बनती हैं। बीते दशक में मायावती का शायद ही कोई ऐसा जन्मदिन था जिसकी चर्चा न हुई हो।
पिछले साल की बात करें तो 2019 में मायावती का जन्मदिन बहुत अच्छे कारण के चलते सुर्खियों में नहीं रहा। कई परतों वाला लगभग 6 फीट का केक बुलाया गया और अंत में उस केक के लिए भगदड़ जैसे हालात बन गए। पार्टी के कार्यकर्ता ही केक के लिए एक दूसरे से छीना झपटी करने लगे।

आचार संहिता के चलते हल्का आयोजन
साल 2018 में पार्टी कार्यकर्ताओं ने ठीक उनके वज़न के बराबर यानी 62 किलो का केक बुलाया। उस दिन को ‘आर्थिक सहयोग दिवस’ के रूप में भी मनाया गया। साल 2017 में पार्टी कार्यकर्ताओं से लेकर पार्टी मुखिया की किस्मत उतनी अच्छी नहीं थी क्योंकि प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने थे। आचार संहिता के चलते केक का आकार भी छोटा था और जन्मदिन का आयोजन भी उतना भव्य नहीं रह गया।
साल 2016 में एक बार फिर कार्यकर्ताओं ने ठीक उनके वज़न के बराबर 60 किलोग्राम का केक बुलाया। इतना ही नहीं केक के साथ ड्रमरोल भी मंगाया गया लेकिन इस साल भी केक के लिए जम कर छीना झपटी मची। साल 2015 में भी हालात जस के तस थे, पार्टी का छोटे से लेकर बड़ा नेता केक के लिए जूझता नज़र आया।

दंगे पीड़ितों के साथ जन्मदिन
2014 में जन्मदिन मनाने की शैली में ज़रा बदलाव आया। इस साल बसपा सुप्रीमो ने फैसला किया कि वह अपना जन्मदिन मुज़फ्फ़रनगर दंगों में पीड़ित लोगों के साथ मनाएंगी। लिहाज़ा मायावती का यह जन्मदिन भी खूब सुर्खियों में रहा।
साल 2013 में मायावती के जन्मदिन पर आर्थिक सहयोग दिवस की आधिकारिक घोषणा हुई और लखनऊ स्थित होटल ताज में उनकी पुस्तक का विमोचन हुआ। इतना ही नहीं पूरा पुलिस महकमा मायावती की सरकार में लगाई गई मूर्तियों में की निगरानी के लिए तैनात कर दिया गया।

5 करोड़ रुपए की माला
साल 2012 पूरे दशक का शायद इकलौता ऐसा जन्मदिन था जो आयोजन के लिहाज़ से काफी सहज था। पार्टी के हर नेता ने मायावती के पैर छू कर आशीर्वाद लिया और इससे अलग कुछ नहीं हुआ। लेकिन 2011 में पूरे लखनऊ को नीले रंग में रंग दिया गया और उस दिन को नाम दिया गया ‘जनकल्याणकारी दिवस’। यह जन्मदिन भी खूब सुर्खियों में बना रहा।
इसके बाद आया दशक का सबसे विवादित जन्मदिन जब बसपा सुप्रीमो को नोटों की माला पहनाई गई। यह माला कोई आम नोटों की माला नहीं थी बल्कि इसमें एक हज़ार से अधिक नोट थे और पूरी माला की कीमत लगभग 5 करोड़ रुपए थी। इतना ही नहीं इस जन्मदिन पर बसपा के एक कार्यकर्ता ने मायावती को चाँद पर ज़मीन खरीदने का ऐलान कर दिया था।

फिलहाल सक्रिय राजनीति से नदारद
यह भी खुद में ताज्जुब वाली बात है कि इसके पहले भी मायावती के जन्मदिन हमेशा से चर्चित रहे। कभी 50 किलो का केक तो कभी हीरे के हार का सेट, कभी एक लाख लड्डू तो कभी 60 कुंतल के फूलों की माला। खैर इस बार भी बसपा मुखिया के जन्मदिन के मौके पर ऐसा कुछ नहीं हुआ, उन्होंने बस मीडिया वालों को संबोधित किया। फिलहाल मायावती प्रदेश और देश की राजनीति में उतनी सक्रिय नहीं नज़र आती हैं, वैसे प्रदेश के विधानसभा चुनाव भी 2022 में हैं।

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