जब जज ने ज़मानत देते वक़्त रवीन्द्रनाथ की ‘व्हेयर द माइंड इज विदाउट फियर’ कविता सुना डाली

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर। दरियागंज हिंसा मामले में दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने बीते बुधवार को भीम आर्मी चीफ़ चंद्रशेखर आजाद को ज़मानत दे दी है। वो भी रवीन्द्रनाथ टैगोर की प्रसिद्ध कविता ‘व्हेयर द माइंड इज विदाउट फियर’ का पाठ करते हुए।

अदालत ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन करना नागरिकों का मौलिक अधिकार है, जिसमें सरकार कटौती नहीं कर सकती है।

चंद्रशेखर आजाद के संगठन ने 20 दिसंबर को पुलिस की अनुमति के बिना सीएए के खिलाफ जामा मस्जिद से जंतर-मंतर तक मार्च का आयोजन किया था। इस मामले में गिरफ्तार अन्य 15 लोगों को अदालत ने 9 जनवरी को जमानत दे दी थी।

एडिशनल सेशन जज कामिनी लॉ ने कहा, “1900 की शुरुआत में जब अंग्रेज फूट डालो, राज करो की नीति अपना रहे थे, तब टैगोर ने ऐसे राष्ट्र की कल्पना की, जहां लोगों के मन में कोई डर न हो। सभी को शिक्षा मिले और भेदभाव की दीवारें न बनाई जाएं।”

जज कामिनी लॉ ने आगे कहा कि लोकतंत्र में हमें अधिकार है शांतिपूर्ण विरोध करना। हमारा संविधान कर्तव्य और अधिकार, दोनों की बात करता है। यह हमारा कर्तव्य है कि हम यह सुनिश्चित करें कि किसी दूसरे के अधिकार का हनन न हो और किसी को कोई असुविधा न हो। उन्होंने कहा टैगोर आज सबसे अधिक प्रासंगिक हैं।

कोर्ट ने चंद्रशेखर को जमानत देने के साथ शर्त भी रखी है। शर्त के मुताबिक, चंद्रशेखर अगले 4 सप्ताह तक दिल्ली में नहीं रहेंगे। दिल्ली में चुनाव होने वाले है। ऐसे में सुरक्षा की दृष्टि से दिल्ली चुनाव में कोई दखल न हो, इसलिए चंद्रशेखर को सख्त निर्देश दिए गए हैं। कोर्ट ने ये भी कहा कि इस मामले में जबतक चार्जशीट दायर नहीं होती, चंद्रशेखर सहारनपुर में हर शनिवार को एसएचओ के सामने अपनी हाजरी देंगे।

आजाद की जमानत याचिका वकील महमूद प्राचा के जरिये दाखिल की गई थी। इसमें कहा गया था कि एफआईआर में आजाद की कोई विशेष भूमिका का जिक्र नहीं है। साथ ही इसका कंटेंट ‘अटकलों’ और ‘संदेह’ पर आधारित है, जबकि वो शांति कायम रखने की कोशिश कर रहे थे।

चंद्रशेखर के वकील महमूद प्राचा ने कोर्ट में चंद्रशेखर के ट्वीट पढ़े। रमा प्रसाद बिस्मिलाह के कोट को चंद्रशेखर ने ट्वीट किया था। कोर्ट ने कहा इस ट्वीट से क्या जनता भड़केगी नहीं? इस पर चद्रशेखर के वकील ने कहा कि आरएसएस का भी ट्वीट है। जिस पर कोर्ट और भड़क गया और कहा कि आप किसी और के ट्वीट का जिक्र यहां मत कीजिए।

भीम आर्मी चीफ ने अपनी याचिका में कहा था कि वह मामले की जांच में पूरा सहयोग करना चाहते हैं। साथ ही वे न तो किसी सबूत से छेड़छाड़ करेंगे, न ही किसी गवाह को प्रभावित करने की कोशिश करेंगे।

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