‘आधार’ नहीं तो आतंक पीड़ितों को मदद भी नहीं

नई दिल्ली

असम-मेघालय को छोड़कर सभी राज्यों में लागू होगी योजना

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आतंकवाद, नक्सली हिंसा या सांप्रदायिक दंगा पीड़ितों को सरकारी सहायता पाने के लिए ‘आधार’ को अनिवार्य कर दिया है। मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर कहा है कि बिना आधार के इस तरह के मामलों में सरकार आर्थिक मदद नहीं दे पाएगी। जिन लोगों ने किसी वजह से आधार नहीं बनवाया होगा, उन्हें भी पहले आधार रजिस्ट्रेशन कराना होगा, तभी वह सरकारी मदद पाने के हकदार होंगे। हालांकि, नए नियम से फिलहाल असम और मेघालय को अलग रखा गया है, क्योंकि वहां आधार का काम पूरा नहीं हो पाया है। केंद्रीय योजनाओं के तहत मदद पाने के लिए आतंकवाद, सांप्रदायिक हिंसा, नक्सली हिंसा, सीमापार से हुई फायरिंग और लैंड माइंस या आईईडी धमाकों के पीड़ितों प्रमाण के तौर पर आधार नंबर दिखाना होगा।

आधार बनवाने के लिए सरकार करेगी प्रचार

इस योजना का लाभ लाभार्थियों को मिलने में कोई परेशानी न हो, इसके लिए गृह मंत्रालय इस योजना को जमीन तक पहुंचाने वाली एजेंसियों के साथ मिलकर जनता के बीच मीडिया के जरिए नए नियमों का प्रचार-प्रसार करेगा, ताकि लाभार्थियों तक इस बात की पूरी जानकारी पहुंचाई जा सके।

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