बच्चों को अगवा करने में मप्र की महिला अपराधी अव्वल

संजय त्रिपाठी | इंदौर

तीन वर्षीय आंकड़ो में जहां अपहरण, चोरी एवं भगाने में 8,197 पुरुष संलिप्त पाए गए जबकि 16,594 महिलाओं इसमें शामिल रहीं

बाल मनोविज्ञान के प्रति महिलाओं की अधिक सवेदनशीलता एवं जानकारी अब बच्चों के प्रति अपराध में महिलाओं की संलिप्तता पर भारी पड़ने लगी है,जिसका ज्वलंत उदाहरण है बाल अपहरण एवं बच्चा चोरी के अपराध में औरतें दुगुने से अधिक की भागीदारी। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) एवं पुरुषों एवं बाल अधिकारों के क्षेत्र में कार्यरत इंदौर की संस्था “पौरुष” के द्वारा जुटाए गए आंकड़ों में चौंकाने वाले तथ्या पाए गए हैं।

बच्चों के खिलाफ किये जाने वाले अपराधों में देशभर में वर्ष 2016 में 89,42,394, वर्ष 2017 में 92,10,665 एवं वर्ष 2018 में 94,86,984 केसेस पंजीबध्द किए गए, जिसमें प्रतिशत के आधार पर उप्र में 15.3%, महाराष्ट्र में 13.% एवं मप्र में 13.1% राष्ट्रीय औसत दर रहीं ! इस तरह से बाल-अपराध में उप्र देश में पहले एवं मप्र तीसरे नंबर पर रहा है। बाल-अपराधों में सार्वाधिक अपराध बाल-अपरहण, बच्चा चोरी एवं बरगला कर भगा कर ले जाने की घटनाएं अन्य अपराध की तुलना में 52.3% रही है। संस्था “ पौरुष” (पीपुल अगेंस्ट अनइक्वल रुल्स यूस्ड टू शेल्टर हरासमेंट) के अध्यक्ष अशोक दशोरा के अनुसार वर्ष 2016 से 2018 तक के तीन वर्षों के एनसीआरबीके औसत आंकड़ों में आश्चर्यजनक रूप से इस सत्य को उजागर किया गया कि बाल-अपहरण, बच्चा-चोरी एवं बच्चों को बहला-फुसलाकर भगा ले जाने में मप्र की महिला हों अपराधी पुरुषों की तुलना में दोगुना से अधिक अपराधों में संलिप्त पाई गई। वर्ष 2016 से 2018 के तीन वर्षीय आंकड़ो में जहां अपहरण, चोरी एवं भगाने में कुल 8,197 पुरुष संलिप्त पाए गए वहीं दूसरी ओर दुगुने से अधिक अर्थात 16,594 महिलाओं ने इन अपराधों को अंजाम दिया।

इंदौर में बाल-अपहरण,भागने एवं बच्चा-चोरी के मामले

बाल-अपराधी : बच्चों द्वारा किये जाने वाले अपराधों के संबंध में तहकीकात करने पर एनसीआरबी के आंकड़ों में मप्र पूरे देशभर में सिरमोर है, वही महाराष्ट्र दूसरे एवं दिल्ली तीसरे नंबर है। 18 वर्ष से कम के अपराधियों के प्रकरण जुवेनाइल कोर्ट में चलते है। वर्तमान समय में वयस्क अपराधियों के लिए कानून में कठोर सजा का प्रावधान होने के कारण आपराधिक-गैंग के द्वार बच्चों से अपराध कराने का प्रचलन तेजी से बड़ा है। मप्र इसमें देशभर में अव्वल है।

पुरुषों की तुलना में 4 से 5 गुना अपराध

इन आंकड़ो में वो संख्या शामिल नहीं है जिसमे पति-पत्नी के विवादों के चलते महिलाए अपने बच्चों को बहला-फुसलाकर अथवा जबरदस्ती अपने ससुराल से बच्चों को भगाकर मायके ले जाती है। यदि इन आंकड़ो को भी शामिल किया जाये,तो ये पुरुषों की तुलना में चार-पांच गुना हो सकते है क्योंकि 80% से 90% महिलाएं दांपत्य-विवादों में बच्चो को हथियार के रूप मे इस्तेमाल करने हेतु उन्हें ससुराल से जबरन उठाकर ले जाती है ताकि वे अपने पति एवं ससुराल वालो का भावनात्मक एवं आर्थिक शोषण कर सके।

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