1984 में झुलसे राजबाड़ा की इमारती लकड़ियों की जांच अब होगी

नगर संवाददाता | इंदौर

राजबाड़ा में लगी इमारती लकड़ियों की जांच के लिए देहरादून से एक्सपर्ट बुलाए जाएंगे। सोमवार को राजवाड़ा के जीर्णोद्धार की समीक्षा के दौरान निगमायुक्त ने ग्राउंड फ्लोर से टॉप फ्लोर तक के काम को भी जांचा। राजवाड़ा के मुख्य भाग वाले हिस्से (चौथी-पांचवीं और छठी मंजिल) में लकड़ियों का काम किया जाना है।

यह काम तीन माह में पूरा होना है। बचे हुए अन्य कार्य 6 माह में पूरा करने के निर्देश है। इस दौरान ठेकेदार ने तीनों मंजिल की पुरानी लकड़ियों की जांच करवाए जाने का सुझाव दिया। इसके बाद लकड़ियों के उपयोग को लेकर चर्चा हुई। आयुक्त ने लकड़ी की जांच के लिए फारेस्ट रिचर्स इंस्टीट्यूट जांच देहरादून से करवाए जाने की बात कही। राजवाड़ा यह हिस्सा 1984 के दंगों की आग में क्षतिग्रस्त हो गया था इसलिए जांच की जरूरत है। स्मार्ट सिटी कम्पनी के चीफ इंजीनियर डी आर लोधी ने बताया राजवाड़ा जीर्णोद्धार के काम हो रही देरी को लेकर निगमायुक्त ने ठेकेदार को जल्द काम पूरा करने की हिदायत दी है। हालांकि ठेकेदार ने तर्क दिया गया कि यह काम नई इमारत बनने जितना आसान नहीं है, पुराना काम होने के कारण इसमें देरी हो रही है। इस पर आयुक्त ने ठेकेदार से ही काम पूरा होने की डेडलाइन पूछ ली। हालांकि ठेकेदार इसका कोई जवाब नहीं दे पाया।

उसने कहा काम में देरी का कारण वुड स्ट्रक्चर की जांच संतुष्टिपूर्ण नहीं होना भी है। राजवाड़ा के जीर्णोद्धार के काम के कंसल्टेंट नितिन श्रीमाली ने बताया कि राजवाड़ा का वो हिस्सा जहां लकड़ी पर चार मंजिलें बनी है, वहां बगैर जांच के काम नहीं किया जा सकता। जल्द बाजी में यदि जांच ठीक से नहीं हुई तो आगे जोखिम रहेगा। अल्ट्रा साउंड तकनिक से एनडीटी (नॉनडिस्टेक्टिव टेस्ट) कराया गया थालेकिन उससे किसी भी निर्णय पर नही पंहुचा जा सका। अब फारेस्ट रिसर्च इंस्टीटयूट ऑफ देहरादून लकड़ी के स्ट्रक्चर की जांच हेतु सम्पर्क किया जा रहा है।

बारिश से पहले काम पूरा होगा

राजवाड़ा के जीर्णोध्दार में देरी होने पर ठेकेदार पर पहले ही 50 लाख रूपए की पेनल्टी लगाई जा चुकी है। एतिहासिक इमारतों के रिनोवेशन के काम परेशानी आती है। सालों पुराना स्ट्रक्चर को फिर से तैयार करने में समय लगता है। क्षतिग्रस्त लकड़ियों की जांच हेतु फॉरेस्ट रिचर्स इंस्टिट्यूट, देहरादून के वूडन स्ट्रक्चर विशेषज्ञ डाॅ. संगीता गुप्ता से चर्चा कर ली गई है। उन्हें इन्दौर आकर राजबाडा स्ट्रक्चर का निरीक्षण कर तकनीकी राय देने हेतु अनुरोध किया है। जीर्णेोद्धार का कार्य बारिश से पहले पूरा करने के निर्देश दिए हैं। आशीष सिंह, निगम आयुक्त, इंदौर

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