संजय-नेहा का ‘तलाकनामा’ लूटता रहा बैंकों का खजाना

विनोद शर्मा | इंदौर

तलाक कंपनी की प्यार भरी धोखाधड़ी

दोनों रहे एक ही छत के नीचे पर बैंकों को तलाकनामा दिखाकर अलग-अलग ऋण लिया, लूट के इस पैसे से इस तलाक वाले जोड़े ने मिलकर ऐश किया

सौ करोड़ से ज्यादा के फर्जी लोन मामले में पकड़े गए संजय कुमार द्विवेदी और पत्नी नेहा द्विवेदी ने कागज़ी तलाक से बैंकों को भी खूब धोखा दिया। दोनों ने तलाकनामा दिखाकर अलग-अलग कंपनियां बनाई, और बैंकों से कर्जे लेते रहे। तलाकनामे के बावजूद दोनों रहे एक ही छत के नीचे।

तलाकनामे वाले इस जोड़े ने बैंकों से खूब मौज उड़ाई। तलाकनामा 2017 से फाइल है, पर तलाक नहीं हुआ। एमपीएफसी और विभिन्न बैंकों में समूह ने संपत्ति गिरवी रखकर 50 करोड़ से अधिक का लोन लिया।

2015 से अलग रहने का दावा करने वाले इस जोड़े ने उसके बाद संयुक्त कंपनियां भी बनाई। प्रजातंत्र की पड़ताल में पता चला कि नेहा द्विवेदी ने संजय द्विवेदी के खिलाफ फेमेली कोर्ट में हिंदु मेरिज एक्ट के तहत केस (1610/2016) दायर किया था। 3 जनवरी 2017 को दो एडिशनल जज ने सुनवाई करके संयुक्त आवेदन खारिज कर दिया। छह महीने का वक्त दे दिया। इस आदेश के खिलाफ 2 फरवरी 2017 को नेहा ने हाईकोर्ट की शरण ली। 2 फरवरी 2017 को हाईकोर्ट ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि इस मामले में सुनवाई का अधिकार सिर्फ सुप्रीमकोर्ट को है।

नेहा ने बताया था कि उसकी और संजय की शादी 27 अप्रैल 2009 को हुई थी। शादी लंबी चली नहीं। 12 जनवरी 2015 से दोनों अलग रहने लगे। तलाक मिलते ही वह इंदौर से दुबई शिफ्ट हो जाएगी।

2015 से अलग रहना बताया फिर भी कंपनियों में साथ

इस कहानी का दूसरा पहलू यह है कि जनवरी 2015 से अलग रहना बताती आ रही नेहा 21 अगस्त 2015 को ट्रिटन माइनिंग एंड मिनिरल्स इंडिया प्रा.लि., वक्रतुंड मिनिरल्स इंडिया प्रा.लि. और वेंकटेश सिविकॉन एंड इन्फ्रारियल इंडिया प्रा.लि. की डायरेक्टर बनी। चौथ दिन 25 अगस्त 2015 को उत्सव इंटरनेशनल कॉर्पोरेशन प्रा.लि. और आर्टेमिस ग्रीनलैंड इन्फ्रावे प्रा.लि. में डायरेक्टर बनी। हालांकि इस दौरान संजय के साथ 4 नवंबर 2011 से जिस समर्थ इन्फ्राबिल्ड इंडिया प्रा.लि. में डायरेक्टर थी वह 1 अगस्त 2012 को छोड़ दी। वहीं जिस व्यंकटेश में वह अगस्त से दिसंबर 2015 के बीच डायरेक्टर रही उसमें संजय भी 2016 तक डायरेक्टर रहा।

अभी भी नेहा सात कंपनियों में डायरेक्टर …

संजय स्वयं समर्थ इन्फ्राबिल्ड में डायरेक्टर है जबकि व्यंकटेश सिविकॉन में नवंबर 2015 से अप्रैल 2016 और डी.एस.केपिटल वेंचर में सितंबर 2016 से नवंबर 2019 तक डायरेक्टर रहा। स्वयं को इन तीनों कंपनियों तक समेटते हुए उसने पूरा खेल नेहा के नाम पर खेला। उसने नेहा को 12 कंपनियों में डायरेक्टर बनाया। 5 से नेहा बाहर हो चुकी है जबकि सात कंपनियों में नेहा डायरेक्टर है। इन कंपनियों में करोड़ों रुपया निवेश करना बताया।

मुंबई को बनाया मूल गढ़…

नेहा जितनी कंपनियों में डायरेक्टर रही है तकरीबन सभी का कॉर्पोरेट एड्रेस दुकान नं.28, सेकंड फ्लोर ओम हीरा पन्ना शॉपिंग मॉल (ओशिवारा पुलिस स्टेशन के पास अंधेरी) मुंबई है।
द्विवेदी, तिवारी और शर्मा गैंग बना दी ,नेहा द्विवेदी, संजय द्विवेदी, अमित द्विवेदी, अनिल कुमार द्विवेदी, विजय द्विवेदी, जाह्नवी द्विवेदी, रोहित शर्मा, संदीप शर्मा, पीयुष शर्मा, दीपाली शर्मा, अभीजीत शर्मा, पुष्पेंद्र तिवारी, अभिषेक तिवारी, रामशरण तिवारी, विपिन तिवारी, अनिल तिवारी, राकेश तिवारी।

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