साहसी कारनामों के लिए 22 ‘बालवीरों’ को राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से नवाजा

नई दिल्ली

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बुधवार को राष्ट्रपति भवन में प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2020 (राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार) का वितरण किया। इसके तहत कुल 22 बच्चों को सम्मानित किया गया।

सम्मान पाने वाले 22 बच्चों में से 10 लड़कियां और 12 लड़के हैं। सम्मानित वीर बच्चों में दो जम्मू-कश्मीर और एक कर्नाटक का किशोर है। कर्नाटक में भीषण बाढ़ के दौरान एंबुलेंस को रास्ता बताने पर इस बालक, वेंकटेश को सम्मानित किया गया है। कुपवाड़ा निवासी 16 वर्षीय सरताज मोहिदन बडगाम के 19 वर्षीय मुदासिर अशरफ को कश्मीर में साहसी कारनामे के लिए वीरता के इस सम्मान के लिए चुना गया।

पुरस्कारों के बदले गए नाम

वीरता पुरस्कार के लिए चुने गए बच्चे गणतंत्र दिवस परेड का हिस्सा नहीं होंगे। आईसीसीडब्ल्यू ने इस साल से पुरस्कारों के नाम भी बदल दिए हैं। पहले संजय चोपड़ाए गीता चोपड़ाए बापू गेधानी नाम से पुरस्कार दिए जाते थे। इस बार से इनके स्थान पर मार्कंडेय पुरस्कारए ध्रुव पुरस्कारए अभिमन्यु पुरस्कारए प्रह्लाद पुरस्कारए व श्रवण नाम से पुरस्कार दिया गया। परिषद की संरक्षक गीता सिद्धार्थ ने बताया कि बहुत समय से पुराने नाम पर ही पुरस्कार दिए जा रहे थे इसलिए इनको बदला गया है। इस बार भारत अवार्ड केरल के 15 वर्षीय आदित्य को दिया गया। जबकि पौड़ी गढ़वाल जिले की 10 वर्षीय राखी को मार्कंडेय पुरस्कारए ओडिशा की 15 वर्षीय पूर्णिमा गिरी व सबिता गिरी को ध्रुव पुरस्कार दिया गया।

अपनी जान की परवाह किए बगैर दोस्तों को बचाया

केरल के एक वीर बालक 16 वर्षीय मुहम्मद मुहसीन को मरणोपरांत यह सम्मान मिला है। पिछले वर्ष के अप्रैल माह में समुद्र में खराब मौसम के कारण खतरे में फंसे अपने तीन मित्रों की जान बचाई थी, लेकिन वह अपनी जान नहीं बचा सका।

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