सेफ सेक्स की मांग करने पर कस्टमर ने महिला की गला काट कर हत्या कर दी

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर। एक महिला सेक्स वर्कर है, उसने सेफ सेक्स की डिमांड की। इतनी जागरूकता के बाद हर किसी को करनी चाहिए लेकिन अगले शख्स ने मना कर दिया। अब उसने सेक्स के लिए दिए पैसे वापस मांगने लगा लेकिन महिला ने मना कर दिया। फ़िर क्या था कस्टमर ने महिला की गला काट कर हत्या कर दी।

दरअसल 42 साल की एक सेक्स वर्कर का शव पश्चिमी बेंगलुरु स्थित उसके घर में पाया गया। पति से अलग होने के बाद महिला अपने बच्चे के साथ राजाजीनगर इलाके में रहती थी। पुलिस ने इस मामले में एक प्राइवेट फर्म में काम करने वाले गार्ड को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार गार्ड ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है।

पुलिस के मुताबिक, मुकुंद नामक गार्ड की महिला से 11 जनवरी को दोपहर एक बजे मुलाकात हुई थी जब वह मांडया के लिए बस पकड़ने वाला था। दोनों के बीच सेक्स को लेकर डील हुई। महिला ने 2500 रुपए मांगे,1500 रुपए में डील तय हुई। महिला ने 500 रुपए एडवांस लिए और अपने घर राजाजीनगर के लिए गार्ड के साथ चल पड़ी। बस और फिर ऑटो से यात्रा तय करने के बाद दोनों महिला के घर पहुंचे।

हम अक्सर तमाम मुद्दों पर बात करते हैं लेकिन जब सेक्स से जुड़ी जागरूकता की बात आती है तो नाक-भौ सिकोड़ने लगते हैं। इस महिला की मौत का कारण वो सारी दकियानूसी सोच का नतीजा है।

पुलिस का कहना है कि मुकुंदा ने जो कुछ पूछताछ के दौरान बताया उसके अनुसार, “उसने महिला को 500 रु एडवांस दिए और घर पहुंचने के बाद बाकी के 1000 रु भी दे दिए। इसके बाद महिला ने उससे सेफ सेक्स के लिए कंडोम यूज करने को कहा, लेकिन वह इसके लिए तैयार नहीं हुआ और अपने पैसे मांगने लगा। महिला ने पैसे लौटाने से इनकार कर दिया और धमकी दी कि अगर बिना कंडोम के सेक्स के लिए उससे कहा या फिर पैसे मांगे तो वह शोर मचाने लगेगी।”

वर्ष 2007 में भारत सरकार ने किशोर शिक्षा कार्यक्रम की शुरुआत की गई थी। इसका लगातार विरोध होता रहा। कुछ राज्यों ने तो इसे प्रतिबंधित कर दिया था। इसके बावजूद यह कार्यक्रम कुछ चुनिंदा सरकारी और निजी स्कूलों में लागू किया गया।

जिसके तहत बताया गया था कि अगर बच्चों को सही यौन शिक्षा नहीं दी गई तो लिंग आधारित हिंसा, लिंग असमानता, प्रारंभिक और अनपेक्षित गर्भधारण, एचआईवी और अन्य यौन संचारित संक्रमण बढ़ते जाएंगे और रोकना मुश्किल हो जाएगा। ऐसे में जरूरी है कि स्कूल में सिर्फ अध्यापक ही नहीं बल्कि माता-पिता भी झिझक को दूर रखकर अपने बच्चे से इस विषय पर बात करें।

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