तबाही के मुहाने पर दुनिया, 100 सेकंड पर आया ‘कयामत की घड़ी’ का कांटा

वॉशिंगटन

साल 1947 से काम कर रही यह घड़ी डूम्स डे क्लॉक बताती है कि दुनिया पर परमाणु हमले की आशंका कितनी है

परमाणु वैज्ञानिकों ने दुनिया के बदलते हालात के मद्देनजर चेतावनी दी है कि इस समय विश्वभर में परमाणु युद्ध का खतरा सबसे ज्यादा है। ‘द बुलेटिन ऑफ द एटॉमिक साइंटिस्ट्स’ (बीएएस) ने गुरुवार को बताया कि दुनिया तबाही के खतरनाक मुहाने पर है। वैज्ञानिकों ने ऐस कयामत की घड़ी की गणना के आधार पर कहा है। इस घड़ी में आधी रात होने में 2 मिनट से भी कम या 100 सेकंड का अंतर रह गया है। शिकागो यूनिवर्सिटी के 15 वैज्ञानिकों की एक टीम ‘द बुलेटिन ऑफ़ द एटॉमिक साइंटिस्ट्स’ (बीएएस) ने 1947 में ‘डूम्स डे क्लॉक’ यानी कयामत की घड़ी बनाई थी। यह घड़ी मानवता के खतरों को जाहिर करने के लिए परमाणु विस्फोट (आधी रात) की कल्पना और शून्य की उलटी गिनती (काउंटडाउन) का इस्तेमाल करती है।

क्या है इसका मतलब?

‘कयामत की घड़ी’ के कांटे को आगे-पीछे करने का काम बीएएस को ही सौंपा गया है। इस घड़ी में 12 बजने का मतलब है कि दुनिया का अंत किसी भी समय हो सकता है या फिर दुनिया पर परमाणु हमले की संभावना 100 फीसदी है। अब तक इसमें 19 बार बदलाव किया जा चुका है। साल 1949 में जब रूस ने अपने पहले परमाणु बम आरडीएस-1का टेस्ट किया और दुनिया में न्यूक्लियर पॉवर बनने की दौड़ शुरू हुई उस वक्त डूम्स डे क्लॉक में तीन मिनट का फासला था।

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