प्रधानमंत्री मोदी के बाद रजनीकान्त के साथ नज़र आएंगे मैन वर्सेज़ वाइल्ड के बियर ग्रिल्स

विभव देव शुक्ला

साल 2019 के अगस्त महीने में डिस्कवरी चैनल पर आने वाला कार्यक्रम मैन वर्सेज़ वाइल्ड का एक हिस्सा काफी चर्चा में था। कार्यक्रम के उस हिस्से में कुछ ऐसा हुआ था जिसकी शायद ही किसी ने कल्पना की होगी। उसमें बियर ग्रिल्स के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी नज़र आए थे जिसकी वजह से वह कार्यक्रम काफी चर्चा में था। एक बार फिर मैन वर्सेज़ वाइल्ड देश की मशहूर हस्ती के साथ शूट होने वाला है, हस्ती का नाम है ‘रजनीकान्त’।

दो दिन चलेगी शूटिंग
रजनीकान्त और पूरी दुनिया में मशहूर मैन वर्सेज़ वाइल्ड की पूरी टीम बियर ग्रिल्स कर्नाटक के बांदीपुरा टाइगर रिज़र्व में शूट करेंगे। सोमवार की शाम से वह टाइगर रिज़र्व में एक डॉक्यूमेंटरी पर काम शुरू करेंगे। इसकी शूटिंग मंगलवार को 6 घंटे के लिए और गुरुवार को दोबारा 6 घंटे तक होगी। जिस तरह से बियर ग्रिल्स दुनिया भर के बर्फीले, जंगली और रेगिस्तान वाले इलाक़ों में ज़िन्दा रहना सिखाते हैं।
उसकी वजह मैन वर्सेज़ वाइल्ड कार्यक्रम भारत समेत दुनिया भर में काफी मशहूर है। लेकिन जब वही बियर ग्रिल्स प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ नज़र आए उसके बाद इस कार्यक्रम का चर्चा भारत में और बढ़ गया। देश भर के लोगों ने उस कार्यक्रम को लेकर ख़ूब प्रतिक्रियाएँ दीं, कहीं उस कार्यक्रम को पसंद किया गया तो कहीं नापसंद भी किया गया।

अक्षय कुमार भी हो सकते हैं शामिल
एक समाचार समूह से बात करते हुए वन विभाग के एक अधिकारी ने इस बारे में तमाम अहम जानकारी दी। उन्होंने कहा कार्यक्रम की शूटिंग दो अलग-अलग दिन 6 घंटे तक होगी। पहली शूटिंग मंगलवार के दिन 28 जनवरी के दिन होगी और दूसरी शूटिंग गुरुवार के दिन 30 जनवरी को होगी। दोनों ही दिन शूटिंग के दौरान विशेष अतिथि भी आएंगे। 28 जनवरी को शूटिंग के दौरान रजनीकान्त रहेंगे और 30 जनवरी के दिन बॉलीवुड कलाकार अक्षय कुमार मौजूद रहेंगे।

सुरक्षा के बीच होगी शूटिंग
पूरे कार्यक्रम की शूटिंग गैर पर्यटक इलाके में होगी जिससे वन विभाग की तरफ से रोज़ाना होने वाली पेट्रोलिंग और फायर लाइन से जुड़ी गतिविधियों पर कोई प्रभाव न पड़े। पूरी शूटिंग वन विभाग द्वारा मुहैया कराई गई विशेष सुरक्षा के बीचोंबीच होगी और शूटिंग की जगह के बारे में किसी को जानकारी नहीं दी जाएगी।
वहीं तमाम जानकारों का कहना है कि बांदीपुरा के इस वन में पिछले कुछ समय इस तरह की गतिविधियां बढ़ती जा रही हैं। ऐसी गतिविधियां केवल तब तक सही हैं जब तक वह सीमित संख्या और सीमित दायरे में होती हैं। इसलिए वन विभाग को इस बात खास तौर पर ध्यान रखना होगा।

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