पाकिस्तानी जेल में गले में जंजीर डालकर रखते थे : आसिया

पेरिस

पाकिस्तान की जेल में दयनीय हाल में आठ साल तक पल-पल मौत की सजा का इंतजार करने वाली आसिया बीबी अब कनाडा में अपनी नई जिंदगी को पटरी पर लाने की कोशिश कर रही हैं।

ईसाई धर्म की अनुयायी आसिया बीबी को ईशनिंदा के आरोप में पाकिस्तान की एक अदालत ने 2010 में मौत की सजा सुनाई थी। 2018 में नाटकीय तरीके से उन्हें रिहा कर दिया गया। वह अब कनाडा में एक अज्ञात स्थान पर रहती हैं। आसिया के जीवन पर एक किताब एनफिन लिबरे (आखिरकार आजादी मिली) आई है जिसमें उन्होंने आपबीती बयां की है।

उन्होंने कहा है कि पाकिस्तानी जेल में उन्हें गले में जंजीर डालकर रखते थे। फ्रांस में बुधवार को प्रकाशित हुई इस किताब का अंग्रेजी संस्करण सितंबर में आएगा। फ्रांस की पत्रकार एन-इजाबेल तोलेत इस किताब की सह-लेखिका हैं और वह कनाडा में आसिया बीबी के समर्थन में अभियान भी चला चुकी हैं। तोलेत एकमात्र पत्रकार हैं जिन्हें कनाडा में आसिया बीबी से मिलने दिया गया।

किताब में आसिया बीबी ने जेल में बिताए अपने दिनों, रिहाई से मिली राहत और एक नए जीवन को संवारने में आ रही दिक्कतों का जिक्र करते हुए कहा है, ‘आप मीडिया के जरिए मेरी कहानी जानते हैं। लेकिन जेल, फिर यहां नई जिंदगी, नई शुरुआत के बारे में आप कुछ नहीं जानते।’पाकिस्तानी जेल में आठ साल बिताने वाली आसिया कहती हैं, ‘मैं कट्टरता की कैदी हो गई थी। आंसू ही जेल में मेरा एकमात्र सहारा थे।’ आसिया बीबी ने किताब में पाकिस्तान में जेल की बुरी स्थिति के बारे में बताया है जहां उन्हें जंजीरों में जकड़ कर रखा गया था। उन्होंने कहा, ‘मेरी कलाइयां जलने लगती थीं, मेरी गर्दन में लोहे की पट्टी बंधी रहती थी।’

दूसरे कैदियों ने भी नहीं दिखाई हमदर्दी

आसिया ने कहा कि दूसरे कैदी भी उनके प्रति कोई अपनापन नहीं दिखाते थे। मुस्लिम बहुल पाक में ईशनिंदा ऐसा अपराध है जिसमें मौत की सजा हो सकती है या महज आरोप भर से आप भीड़ का शिकार हो सकते हैं। आसिया का झगड़ा 2009 में एक मुस्लिम से हो गया था जिसके बाद उसने उन पर ईशनिंदा का आरोप लगा दिया। आसिया बीबी इस आरोप से इनकार करती रही हैं। उन्होंने किताब में लिखा है कि मुस्लिम बहुल देश में अल्पसंख्यक ईसाइयों को प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है। फिलहाल कनाडा में सुरक्षित जीवन जी रहीं आसिया बीबी कभी भी अपने वतन न लौटने की शर्त से बंधी हुई हैं। उन्होंने कहा, ‘मैं उस समय बुरी तरह से टूट गई जब मैं अपने परिवारवालों से मिले बिना यहां के लिए रवाना हो गई। मुझे अपने देश से प्यार है, लेकिन मैं हमेशा के लिए निर्वासन में हूं।’’

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