जब एक ‘रामभक्त’ की गोली, ‘राम’ के साथ खड़े शादाब को लगी

विभव देव शुक्ला

बीते दिन राजधानी दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया में जो घटना हुई उसका असर आज तक बरकरार है। एक युवक ने गोली चलाई और शोर पूरे देश में मचा हुआ है। देश की राजधानी स्थित जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्र सीएए और एनआरसी का विरोध करते हुए राजघाट की तरफ आगे बढ़ रहे थे। तभी अचानक से दो नारे सुनाई दिए, ‘दिल्ली पुलिस ज़िन्दाबाद और वंदे मातरम।’

प्रदर्शन के दौरान हुई घटना
इसके पहले कि मौजूद लोगों में कोई कुछ समझ आता नारे लगाने वाले युवक के हाथ में हथियार नज़र आया। हथियार लहराते और नारे लगाते हुए युवक आगे बढ़ा और उसने गोली चला दी। गोली जामिया मिलिया इस्लामिया में पढ़ने वाले एक शादाब नाम के छात्र को लगी, जिसके बाद पुलिस ने युवक को हिरासत में ले लिया। गोली चलाने वाले और गोली चलाने के पीछे दबी भावना, दोनों की खूब आलोचना हो रही है। अमूमन पूरी बहस ही इस बिन्दु के आस-पास घूमती है कि प्रदर्शन करने वाले आम लोगों पर गोली क्यों?

रामभक्त गोपाल
गोली चलाने वाले युवक की फेसबुक प्रोफाइल भी है और वहाँ उसने अपना नाम लिखा था ‘रामभक्त गोपाल’। नाम से इतना साफ़ है कि गोपाल स्वघोषित श्रीराम का भक्त है, उसकी राम में आस्था और भरोसा है। साथ ही उसने गोली चलाने के पहले अपने फेसबुक से तमाम बातें भी लिखीं जिसमें सबसे ज़्यादा गौर करने लायक बात थी “ध्यान दें!! कृपा करके 31st तारीख़ तक मेरी पोस्टों को नज़र अंदाज़ न करें।” युवक ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि वह ऐसी किसी हरकत को अंजाम दे सकता है।

श्रीराम के संग तस्वीर
पूरी घटना में दूसरा पहलू है जिसे लेकर में चर्चा का दायरा बेहद सीमित है। शादाब नाम के जिस छात्र को गोली लगी है उसकी एक तस्वीर और वीडियो सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में है। वीडियो में शादाब एक झांकी में जम कर नाच रहा है, उसके आस-पास लोगों ने अपने भगवा रंग का साफा बांध रखा है। वीडियो एक झांकी का है, कोई ऐसी वैसी नहीं बल्कि ‘श्रीराम’ की झांकी।
वीडियो के अलावा शादाब की एक तस्वीर का सोशल मीडिया पर खूब ज़िक्र हो रहा है। तस्वीर में शादाब झांकी में ‘श्रीराम’ का रूप धारण किए हुए व्यक्ति के साथ खड़ा है और उसके चेहरे पर नज़र आने वाला भाव खुद तस्वीर की कहानी बयान कर रहा है। कुल मिला कर तस्वीर और वीडियो को देख कर किसी के लिए भी श्रीराम के प्रति शादाब के जज़्बात आसानी से समझे जा सकते हैं।

इस गोली में आवाज़ नहीं
लेकिन अफ़सोस कि गोली चलाने वाले ने खुद को रामभक्त बताया और जिसे गोली लगी, राम के साथ उसकी तस्वीर सबने देख ही ली। इसके बाद बहस के किसी भी खेमे में दलीलें कम पड़ जाती हैं। यह तो कुछ ऐसा ही हुआ कि राम की भक्ति में चली गोली राम के साथ खड़े हुए व्यक्ति को लगी। घटना का अंजाम कुछ भी हो पर ऐसी घटनाओं में गोली में आवाज़ कम होती है और असर लंबे समय तक रहता है।

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