झांसी की रानी से पहले इंदौर की महारानी तुलसा बाई ने छुड़ाए थे अंग्रेजों के छक्के

नगर संवाददाता | इंदौर

झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की शौर्यगाथा से तो पूरा सभी परिचित हैं, लेकिन रानी झांसी से करीब 40 साल पहले अंग्रेजों से लोहा लेने वाली महारानी तुलसा बाई होलकर के अदम्य साहस और संघर्ष की गाथा दो सौ वर्षों तक अनकही-अनसुनी ही रही। होलकर रियासत के यशवंतराव होलकर प्रथम की मृत्यु पश्चात तुलसाबाई ने चार वर्ष के पुत्र मल्हारराव को गद्दी पर बैठाया, राजधानी में अंदरुनी विद्रोह पर काबू पाने के साथ ही सैनिकों के साहस को कायम रखा। अंग्रेजों में उनका भय इस कदर था कि युद्ध में जब उन्हें जीवित बंदी ना बना सके तो सैनिकों को अपने साथ मिलाकर तुलसा बाई की हत्या करा दी।

महारानी तुलसा बाई होलकर’ किताब का लोकार्पण हुआ

भरतपुर (राज) के लेखक घनश्याम होल्कर ने चौंकाने वाले ऐसे कई प्रसंग सुनाए। राजस्थानी ग्रंथागार जोधपुर से प्रकाशित इस किताब का लोकार्पण प्रेस क्लब में राजा यशवंतराव होलकर राष्ट्रीय एकता मंच द्वारा आयोजित समारोह में हुआ। कहा कि मराठे, भोंसले, सिंधिया, पेशवा अंग्रेजों से संधि कर चुके थे, लेकिन तुलसाबाई नहीं झुकी। होलकर इससे पहले महाराजा यशवंतराव, राज महेश्वर, यशवंत यश गाथा, भरतपुर पत्रकारिता और विकास, लुहागढ़ और हमारा समाज, प्रेरणा, क्रांतिवीर संगरोली रायन्ना किताबें लिख चुके हैं।

अश्विनी शोध संस्थान महिदपुर के निदेशक डॉ. रामचंद्र ठाकुर ने कहा महिदपुर तुलसाबाई के वध का गवाह है। 3 हजार सैनिक युद्ध में मारे गए। बाकी घायल ठंड-बारिश-ओले पड़ने से शहीद हो गए। पुरातत्व उत्खनन प्रभारी (उज्जैन) डॉ. रमण सोलंकी ने कहा इतिहासकारों की लड़ाई में हमारा इतिहास बेहतर तरीके से उजागर नहीं हुआ। तात्कालिक इतिहास को घनश्याम होल्कर ने उजागर किया। समारोह के अध्यक्ष पूर्व कुलपति डॉ. भरत छापरवाल, सूर्यकांत बारगल, डॉ. प्रभु चौधरी, हरीश बारगल ने भी संबोधित किया। इस दौरान प्रस्ताव रखा गया कि भरतपुर और महिदपुर में प्रतिवर्ष मेला लगाएं। साहित्यकार डॉ. प्रभु चौधरी ने कहा यह दुर्भाग्य है कि इतिहास में वीरों को सम्मान नहीं दिया गया।

पुण्यश्लोक गौरव समाजसेवा सम्मान से सम्मानित किया

लेखक घनश्याम होलकर ने विट्ठल राव गावड़े, लक्ष्मण दातिर, कीर्ति राणा, स्वामी समर्थ मंडल, राजेंद्र लालगे, सूर्यकांत बारगल, मनोज फणसे, रवींद्र होल्कर, संजीव गवते, डॉ. रजनी काले, डॉ. रजनी काले, आशीष होल्कर, दीपिका-कमलेश नाचन, पंकज काले, करुणेश मंडलिक, सविता शिंदे और सुनील मतकर का पुण्यश्लोक गौरव समाजसेवा अलंकरण से सम्मान किया।

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