निर्मला सीतारमण ने बजट के दौरान जो कविता पढ़ी उसने कभी कश्मीर में भी भरा था जोश

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर। माह-ए-फरवरी का पहला दिन, मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का दूसरा बजट आज आ चुका है। सुबह 10 बजे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में पहुंची। उनके साथ वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर भी थे। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज सदन में देश का आम जबट पेश कर रही हैं।

यह इस दशक का पहला आम बजट है और सरकार के अलावा नागरिकों के लिए भी काफी खास है। बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री ने जम्मू कश्मीर पर लिखी एक कविता का जिक्र भी किया। इस कविता का कश्मीर के लोकप्रिय कवि दीनानाथ कौल ने लिखा था।

लोकसभा यानी कि निचला सदन। निर्मला सीतारमण ने अपना बजट भाषण पढ़ना शुरू किया। उन्होंने अपने सरकार की उपलब्धियां गिनवाईं, प्रधानमंत्री को धन्यवाद किया और केंद्रीय बजट 2020 की योजनाएं बतानी शुरू कीं। लेकिन उससे पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कश्मीरी भाषा में इस कविता को पढ़ा था और फिर हिंदी में इसका अनुवाद पढ़कर सुनाया था। हिंदी में यह कविता कुछ इस तरह से थी,

हमारा वतन खिलते हुए शालीमार बाग़ जैसा है.
हमारा वतन डल झील में खिलते हुए कमल जैसा है,
नौजवानों के गरम खून जैसा है,
मेरा वतन तेरा वतन, हमारा वतन,
दुनिया का सबसे प्यारा वतन है.
नदीम उपनाम से लिखते थे कविता

दीनानाथ कौल का उपनाम नदीम था और इसी नाम से उनकी कविताएं प्रकाशित होती थी। उन्हें कश्मीर के 20वीं सदी के प्रगतिशाली कवि होने का दर्जा हासिल है। 18 मार्च 2016 को श्रीनगर में जन्में दीनानाथ ने कश्मीर में आधुनिक कश्मीरी कविता का दौर शुरू किया था। वह कश्मीरी भाषा बोलते थे।

शुरुआत में उन्होंने हिंदी और उर्दू में कविताएं लिखीं। कवियों के बड़े ग्रुप पर उनका प्रभाव आसानी से देखा जा सकता था। जो कविता सीतारमण ने पढ़ी, कहते हैं कि वह डोगरा समुदाय को प्रोत्साहित करने के मकसद से लिखी गई थी।

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