स्मार्टफोन के दौर में इस महाविद्यालय की लड़कियों ने जताई ‘मोबाइल फ्री ज़ोन’ पर सहमति

विभव देव शुक्ला

गुज़रे दशक में स्मार्टफोन से बड़ी क्रान्ति शायद ही कोई दूसरी होगी। ऐसी क्रान्ति जो शुरुआत में ज़िन्दगी का एक अहम हिस्सा थी और अब दिनचर्या का एक अहम हिस्सा है। ऐसा हिस्सा जिसकी मौजूदगी से लेकर गैर मौजूदगी तक सारी बातों का बखूबी असर पड़ता है हम पर। लेकिन हर सिक्के के दो पहलू होते हैं, एक अच्छा तो दूसरा ज़रा कम अच्छा। जो स्मार्टफोन तमाम मामलों में काम का है उसी स्मार्टफोन के कुछ ऐसे पहलू भी हैं जो बहुत बेहतर नहीं हैं।

सबकी सहमति से उठाया गया कदम
इन बातों के इर्द-गिर्द घूमता हुआ एक आदेश जारी किया है। औरंगाबाद में एक महाविद्यालय है डॉक्टर रफ़ीक ज़ाकिरिया वुमेन्स कॉलेज। महाविद्यालय प्रशासन ने परिसर के भीतर स्मार्टफोन को लेकर एक पहल शुरू की है, ‘मोबाइल फ्री ज़ोन’। महाविद्यालय के प्रधानाचार्य का कहना है कि लड़कियां इस फैसले से खुश हैं।
उनकी ध्यान लगाए रखने की क्षमता में भी इजाफ़ा हुआ है। इतना ही नहीं उनकी आपस में भी बातचीत बढ़ी है। सबसे बड़ी बात कि यह कदम छात्राओं, उनके घर वालों और शिक्षकों की सहमति से उठाया गया है। आखिरकार इस फैसले से हर व्यक्ति खुश है और हमें सकारात्मक नतीजे हासिल हो रहे हैं।

कॉल करने से पहले देनी होगी जानकारी
इसके अलावा महाविद्यालय की उप प्रधानाचार्या ने भी इस बारे में कई बातें बताई हैं। छात्राएँ कंप्यूटर/पढ़ने वाले कक्ष में इन्टरनेट की मदद ले सकती हैं। अगर उन्हें कॉल करने की आवश्यकता पड़ती है तो वह पढ़ने वाले कक्ष में ऐसा कर सकती हैं। इसके लिए उन्हें पहले अपना नाम, रोल नंबर, मोबाइल नंबर और जिस व्यक्ति को वह कॉल करना चाहती हैं उसका नाम एक रजिस्टर में लिखना होगा। हमारे इस कदम से अभी तक किसी छात्रा को परेशानी नहीं हुई है और अभी तक इससे जुड़ी कोई परेशानी भी सामने नहीं आई है।

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