फर्रुखाबाद में बच्चों को बंधक बनाने वाले शख्स की बेटी की देखभाल करेगी पुलिस

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर। अगर पुलिस की कहानी की डायरी पलटें तो शायद उत्तर प्रदेश पुलिस की कथाएं आपको हर दो पन्ने के बाद पढ़ने को मिल जाएगी। कुछ अच्छी तो कुछ आश्चर्य करने वाली लेकिन आज आपके सामने यूपी पुलिस की एक ऐसी भावुक करने वाली ख़बर सामने है जिसे पढ़ कर मुहब्बत के सिवा कोई और इमोशन आ ही नहीं सकती।

फर्रुखाबाद के मोहम्मदाबाद के करथिया गांव में 24 बच्चों को बंधक बनाने और पुलिस मुठभेड़ में मारे गए सुभाष बाथम की बेटी की जिम्मेदारी अब फर्रुखाबाद पुलिस के कंधों पर है। सुभाष के बाद भीड़ की पिटाई से पत्नी रूबी की मौत के बाद एक साल की मासूम कुसुम को लेने कोई नहीं आया।

पुलिस के मुताबिक इस घटना के बाद सुभाष के परिवार वालों ने बच्ची की जिम्मेदारी उठाने से ही इनकार कर दिया था। जब तक उसके लिए कोई परिवार नहीं मिल जाता है, तब तक पुलिस बच्ची की परवरिश करेगी। आइजी रेंज मोहित अग्रवाल ने बताया कि बच्ची की देखभाल फर्रुखाबाद में ही किसी महिला पुलिसकर्मी को दी जाएगी। अगर कोई बाहरी व्यक्ति बच्ची को गोद लेने के लिए आवेदन करेगा तो उस पर भी प्रशासनिक स्तर से विचार किया जाएगा।

आईजी कानपुर रेंज मोहित अग्रवाल ने कहा, “बाथम के परिवार के सदस्यों में से किसी ने भी उसकी एक वर्षीय बेटी को अपनाने के लिए हमसे संपर्क नहीं किया है। यदि कोई नहीं पहुंचता है, तो हम यह सुनिश्चित करेंगे कि बच्चे को हमारे ऐसे कर्मी द्वारा अपनाया जाए जिसके पास कोई संतान नहीं है। ”

आईजी ने कहा कि बच्ची जब तक वह पुलिस कस्टडी में रहेगी, तब तक उसका सारा खर्च विभाग वहन करेगा। उन्होंने यह घोषणा किया कि यह सुनिश्चित किया जाएगा कि बच्ची के पढ़ाई का खर्च भी पुलिस विभाग द्वारा वहन किया जाए और उसे अच्छी शिक्षा मिल सके। पुलिस ने बाथम की मां सुरजा देवी से भी संपर्क किया, लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं मिला है।

क्या था सुभाष बाथम का पूरा मामला

बाथम ने बीती गुरुवार रात बेटी के जन्मदिन के बहाने 25 बच्चों को आमंत्रित कर उन्हें बंदी बना लिया था। बाद में उसी रात पुलिस ऑपरेशन में बाथम मारा गया था। गुस्साई भीड़ ने सुभाष बाथम की पत्नी रूबी को पीट-पीट कर मौत के घाट उतार दिया था।

सुभाष बाथम नाम के शख्स को अदालत ने हत्या के मामले में उम्र कैद की सज़ा सुनाई थी, नतीजतन वह उम्र कैद की सज़ा काट रहा था। इतना ही नहीं, अपने गाँव के तमाम लोगों से उसके काफी विवाद भी थे। गुरुवार के दिन उसने अपनी बेटी का जन्मदिन मनाने के बहाने से गाँव के लगभग 23 बच्चों को अपने घर पर बुला कर बंधक बना लिया। घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर पुलिस भी पहुंची। इतने बच्चे लगातार 8 घंटे के लिए एक इंसान की गिरफ्त में फंसे हुए थे लेकिन तमाम कोशिशों के बाद वह बच्चे किसी तरह छुड़ाए गए।

सुभाष के मोबाइल से मिले नंबरों के सहारे पुलिस बारूद कनेक्शन तलाश रही है। ढूंढ़ा जा रहा है कि आखिर वह कौन है जिसने इतनी बड़ी मात्रा में उसे बम और बारूद मुहैया कराए थे। आरोपित के मोबाइल में मिले एक दर्जन नंबरों को पुलिस ने सर्विलांस पर लगाया है। कम पढ़ा-लिखा होने के बावजूद शातिर सुभाष स्मार्ट फोन के इस्तेमाल में काफी माहिर था। उसके घर से बरामद एक एंड्रायड फोन की सर्च हिस्ट्री के अनुसार वह यू-ट्यूब और गूगल गुरू के सहारे बम और डेटोनेटर बनाने के तरीके सर्च किया करता था।

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