आदिवासी बच्चों से सीख लेकर इस शहर के हर छात्रावास में लगाई जाएंगी सब्जियाँ

विभव देव शुक्ला

ऐसा माना और कहा जाता है कि बड़े-बड़े बदलावों के लिए छोटी-छोटी कोशिशें बहुत होती हैं। तमाम छोटी कोशिशें मिल कर ही बड़े बदलाव की नींव रखती हैं बस देर कोशिश करने की होती है। ऐसी ही एक कोशिश हुई है छत्तीसगढ़ के कांकेर ज़िले में जिससे आस-पास के सभी लोगों ने सीख ली। पहल के साथ सबसे अच्छी बात यह है कि इसकी शुरुआत पढ़ने वाले बच्चों ने की है।

क्या है पोषण वाटिका
छत्तीसगढ़ के कांकेर ज़िले के पंडरीपानी गाँव में प्री-मेट्रिक आदिवासी बालक छात्रावास है। इस छात्रावास में रहने वाले आदिवासी छात्रों ने पोषण वाटिका की शुरुआत की है। यह वाटिका आदिवासी छात्रावास के भीतर ही बनाई गई है और इसमें सब्जियाँ उगाई गई हैं। इसकी देखरेख भी छात्रावास में रहने वाले छात्र ही करते हैं, वह खुद पोषण वाटिका में सब्जियाँ लगाते हैं। इस पहल की काफी सराहना भी हो रही है।
लेकिन पोषण वाटिका की सबसे बड़ी सराहना तब हुई जब इस पर ज़िला प्रशासन की नज़र गई। इसे देखने के बाद ज़िला प्रशासन ने एक आदेश जारी किया जिसके बाद ज़िले के सभी छात्रावासों को इस तरह की वाटिका बनानी होगी। नतीजतन उन छात्रावासों में रहने वाले छात्र ही सब्जियाँ लगाएंगे और उन्हें ही इसका लाभ भी मिलेगा। यह आदेश ज़िले में मौजूद हर छात्रावास के लिए जारी किया गया है।

बच्चों को दिए जाएंगे बीज
समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कांकेर के कलेक्टर ने आदेश के बारे में कई अहम जानकारी दी। उन्होंने कहा हमने उद्यान विभाग से इस बारे में बात की है और उन्हें बीज बांटने का आदेश दिया है। जिससे उन्हें पौधे लगाने में कोई परेशानी न आए। हरी सब्जियाँ बच्चों के खाने का अच्छा ज़रिया साबित होंगी, हम बच्चों को वैज्ञानिक तरीके से सब्जियाँ लगाने का प्रशिक्षण भी देंगे। जिससे इस पहल को और प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाया जा सके और ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक फायदा पहुँचे।

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