इंदौर में भाजपा के एकमात्र मुस्लिम पार्षद ने विरोध में छोड़ी पार्टी

नगर संवाददाता | इंदौर

नगर निगम में भाजपा के मुस्लिम चेहरे पार्षद उस्मान पटेल ने परिषद का कार्यकाल समाप्त होने के एक सप्ताह पहले पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। 1980 में अटल बिहारी वाजपेयी के कार्य व्यवहार से प्रेरित होकर भाजपा में शामिल हुए उस्मान पटेल का खजराना क्षेत्र में प्रभाव रहा है।पार्टी से मोहभंग होने का कारण सीएए, एनपीआर को लेकर अल्पसंख्यकों में बढ़ती असुरक्षा, परिजन, कार्यकर्ताओं का भाजपा छोड़ने का बढ़ता दबाव बताया है। पटेल का दावा है कि उनके साथ क्षेत्र के 500 कार्यकर्ताओं ने भी पार्टी छोड़ दी है। दूसरी तरफ नगर भाजपा अध्यक्ष गोपी नेमा ने ऐसे किसी इस्तीफे की लिखित जानकारी से इनकार किया है।

नगर निगम में कांग्रेस के पार्षदों में मुस्लिम पार्षदों की संख्या 8 है जबकि भाजपा में एकमात्र उस्मान पटेल ही मुस्लिम चेहरा रहे हैं जो दो बार खजराना से निर्वाचित हुए हैं। करीब 40साल से पार्टी में सक्रिय उस्मान पटेल 2000-05 तक वार्ड 9 क्षेत्र खजराना से पहली बार पार्षद निर्वाचित हुए। तब महापौर कैलाश विजयवर्गीय के साथ एमआईसी के सदस्य रहे। 2010 में यह वार्ड महिला के लिए आरक्षित होने से पार्टी ने उनकी पत्नी जमीला पटेल को टिकट दिया लेकिन वे कांग्रेस की रुबीना इकबाल खान से हार गईं।2015 में वार्ड 38 हो जाने से भाजपा ने फिर उस्मान पटेल पर भरोसा किया और वे सभी 22 बूथ से लीड लेकर 5500 मतों से जीते। भाजपा अल्पसंख्यक वर्ग का प्रतिनिधित्व करने वाले पार्षद उस्मान पटेल ने चर्चा में कहा देश तोड़ने की विचारधारा इस समय काम कर रही है इसीलिए वे पार्टी से इस्तीफा दे रहे हैं।

कांग्रेस में जाने से फिलहाल किया इनकार

सीएए और एनपीआर को लेकर शहर की मुस्लिम बहुल बस्तियों में भी भाजपा के खिलाफ नाराजी व्याप्त है। इस बढ़ती नाराजी में भाजपा पार्षद पटेल भी असहज तो महसूस कर ही रहे थे, भविष्य की राजनीति में उनके लिए परेशानी भी बढ़ सकती थी। पार्टी छोड़ने वाले पटेल ने चर्चा में फिलहाल कांग्रेस में जाने से इंकार किया है। सूत्रों की मानें तो कांग्रेसी नेताओं ने उस्मान पटेल को नगर निगम का टिकट देने और पार्टी में सम्मानजनक स्थान देने का वादा किया है।

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