इल्तिजा मुफ्ती ने कहा, मां को चपातियों के बीच छिपाकर भेजती थी चिट्ठी

श्रीनगर

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती ने अपनी मां और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर पीएसए को अन्यायोचित ठहराया। इल्तिजा ने आरोप लगाया है कि उन्हें उनकी मां से बात नहीं करने दी जाती थी और वह अपनी मां को चपातियों के बीच चिट्ठी छिपाकर भेजती थी।

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद कई नेताओं को एहतियातन हिरासत में लिया गया था। इनमें से कइयों को चरणबद्ध तरीके से रिहा किया जा चुका है। उमर और महबूबा पर जन सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत मामला दर्ज किया गया है। इल्तिजा मुफ्ती ने अपनी मां महबूबा के अधिकारिक ट्विटर हैंडल पर कई ट्वीट कर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। पिछले वर्ष सितंबर माह से इल्तिजा ही अपनी मां की तरफ से उनका ट्विटर हैंडल संचालित कर रही हैं। इल्तिजा ने ट्विटर पर बीते छह माह के अपने अनुभवों का जिक्र करते हुए लिखा है कि मां (महबूबा) को नजरबंद करने के बाद पूरे परिवार को कई परेशानियों का सामना करना पड़ा।

कई दिनों तक पता नहीं चला कि मां कैसी है। कुछ दिन बाद उनके लिए भिजवाए गए टिफिन में उनके हाथ की लिखी एक पर्ची मिली। इसमें उन्होंने लिखा था कि सरकार ने मुझसे अंडरटेकिंग ली है कि मैं बातचीत के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल नहीं करूंगी। अगर कोई दूसरा करता है तो उस पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज होगा। मैं तुम्हे बहुत याद करती हूं, ढेर सारा प्यार।

इल्तिजा ने बताया कि जब मेरी मां की पहली चिट्ठी मुझे मिली तो हमें यह समझ में नहीं आ रहा था कि जवाब कैसे भेजा जाए। मेरी नानी ने एक अनूठा रास्ता सुझाया, मैंने जो खत लिखा, वह एक छोटी सी पर्ची पर लिखा और उसे अच्छी तरह मोड़कर एक चपाती के भीतर छिपाया गया। यह सिलसिला कुछ दिनों तक चला। बता दें कि महबूबा के लिए घर से खाना भेजने की सुविधा प्रशासन ने दी थी। इल्तिजा ने एक अन्य ट्वीट में लिखा, उमर और महबूबा को जम्मू कश्मीर में केंद्र की कार्रवाईयों पर सवाल उठाने पर ही पीएसए लगाया गया है।

महबूबा मुफ्ती पर अलगाववादियों के साथ काम करने का आरोप

श्रीनगर। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पाट की अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के अनुच्छेद 370 पर विवादित बयान, आतंकियों के प्रति नरम रवैया और अलगाववादियों के साथ काम करने ही मुख्य रूप से जन सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) का आधार बना। उनकी पाट का झंडा और निशान भी उनके लिए पीएसए के कारणों में एक है। सिर्फ महबूबा ही नहीं पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को भी अनुच्छेद 370 और जम्मू-कश्मीर भारत विलय पर भड़काऊ बयानबाजी के लिए जरूर रंज होगा। उन पर पीएसए के लिए बनाए आधार पर उनकी बयानबाजी का जिक्र है।

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