दोषी ब्रजेश ठाकुर समेत 12 को कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा, एक आरोपी बरी

पटना

अदालत ने 19 आरोपियों को कई लड़कियों के यौनशोषण और शारीरिक उत्पीड़न का दोषी करार दिया था

बिहार की राजनीति में भूचाल लाने वाले मुजफ्फरपुर शेल्टर होम केस में मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर समेत 11 अन्य को भी मंगलवार को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। दिल्ली की साकेत कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाया। ठाकुर को अपना बचा हुआ जीवन अब जेल में गुजारना होगा। इसके अलावा अदालत ने एक आरोपी मोहम्मद साहिल उर्फ विक्की को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।

इस मामले में ठाकुर समेत 19 आरोपियों को दोषी ठहराया था। इन सभी को शेल्टर होम में रहने वाली लड़कियों के यौन उत्पीड़न का दोषी करार दिया गया था। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ कुलश्रेष्ठ की अदालत ने मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर समेत 19 लोगों को 1045 पन्नों के अपने आदेश में दोषी ठहराया था। इस मामले में आरोपियों के खिलाफ पॉक्सो ऐक्ट के तहत भी केस दर्ज किया गया था। सीबीआई ने दोषी ब्रजेश ठाकुर को आजीवन उम्रकैद की सजा दिए जाने का अनुरोध किया था। सीबीआई ने मामले के अन्य दोषियों को भी अधिकतम सजा देने की मांग की थी।

जनवरी में अदालत ने ब्रजेश और 18 अन्य को दोषी करार दिया था

गौरतलब है कि अदालत ने मुजफ्फरपुर आश्रय गृह मामले में 20 जनवरी को ब्रजेश ठाकुर और 18 अन्य को कई लड़कियों के यौन शोषण एवं शारीरिक उत्पीड़न का दोषी करार दिया था। केंद्र का संचालक बिहार पीपुल्स पार्टी का पूर्व विधायक ब्रजेश ठाकुर था। अदालत ने पहले आदेश एक महीने के लिए 14 जनवरी तक टाल दिया था। उस समय मामले की सुनवाई कर रहे जज सौरभ कुलश्रेष्ठ छुट्टी पर थे। इससे पहले अदालत ने नवंबर में फैसला एक महीने के लिए टाल दिया था।

तब तिहाड़ केंद्रीय जेल में बंद 20 आरोपियों को राष्ट्रीय राजधानी की सभी छह जिला अदालतों में वकीलों की हड़ताल के कारण अदालत परिसर नहीं लाया जा सका था। अदालत ने 20 मार्च, 2018 को ठाकुर समेत आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए थे। इनमें आठ महिलाएं और 12 पुरुष शामिल हैं। इन आरोपों में अधिकतम आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है।

विधायक का चुनाव लड़ चुका है ठाकुर

मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर ने 2000 में मुजफ्फरपुर के कुढ़नी विधानसभा क्षेत्र से बिहार पीपल्स पार्टी (बीपीपी) के टिकट पर चुनाव लड़ा था और हार गया था। आरोपियों में 12 पुरुष और आठ महिलाएं शामिल थी। यह मामला टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज की ओर से 26 मई, 2018 को बिहार सरकार को सौंपी गई एक रिपोर्ट के बाद सौंपने आया था। इस रिपोर्ट में किसी आश्रय गृह में पहली बार नाबालिग लड़कियों के साथ यौन उत्पीड़न का खुलासा हुआ था।

पूर्व समाज कल्याण मंत्री की हुई थी आलोचना

इस मामले में बिहार की पूर्व समाज कल्याण मंत्री और जद (यू) की तत्कालीन नेता मंजू वर्मा को भी आलोचना का शिकार होना पड़ा था, जब उनके पति के ठाकुर के साथ संबंध होने के आरोप सामने आए थे। मंजू वर्मा ने आठ अगस्त, 2018 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर इस मामले को सात फरवरी, 2019 को बिहार के मुजफ्फरपुर की स्थानीय अदालत से दिल्ली के साकेत जिला अदालत परिसर की पॉक्सो अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया था।

34 छात्राओं के यौन उत्पीड़न का मामला

मुजफ्फरनगर के बालिका गृह में 34 छात्राओं के यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया था। मेडिकल टेस्ट में तकरीबन 34 बच्चियों के यौन शोषण की पुष्टि हुई थी। सुनवाई के दौरान पीड़ितों ने यह भी खुलासा किया कि उन्हें नशीला दवाएं देने के साथ मारा-पीटा जाता था, फिर उनके साथ जबरन यौन शोषण किया जाता था। केस में सीबीआई की चार्जशीट के मुताबिक मुजफ्फरपुर शेल्टर होम कांड में कर्मचारी भी शामिल थे। वे भी मासूम बच्चियों को दरिंदगी का शिकार बना रहे थे। यह भी आरोप है कि बिहार सरकार के समाज कल्याण विभाग के अधिकारी भी बच्चियों के साथ गलत काम में शामिल थे।

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