असम सरकार का आदेश, बंद किए जाएंगे मदरसे और संस्कृत विद्यालय

विभव देव शुक्ला

शिक्षा को लेकर सरकारें अक्सर छोटे-बड़े कदम उठाती रहती हैं। राज्य सरकारों से लेकर केंद्र सरकार तक, शिक्षा सभी के लिए अहम मुद्दा है। असम सरकार शिक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाने वाली है। असम के भीतर प्रदेश सरकार के तहत आने वाले मदरसे और संस्कृत विद्यालयों को बंद किया जाएगा। या यूं कहें धार्मिक विद्यालयों को पूरी तरह बदला जाएगा और उन्हें बदल कर माध्यमिक शिक्षा और उच्चतर माध्यमिक शिक्षा में तब्दील किया जाएगा।

बदले जाएंगे संकृत विद्यालय और मदरसे
असम राज्य सरकार में शिक्षा मंत्री हिमन्त विश्व शर्मा ने पत्रकारों से बात करते हुए इस बारे में पूरी जानकारी दी। उन्होंने कहा असम राज्य सरकार के अंतर्गत आने वाले संस्कृत विद्यालय और मदरसे को बंद करके उन्हें माध्यमिक विद्यालय और उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में तब्दील किया जाएगा।
यह प्रक्रिया एक महीने के भीतर पूरी हो जाएगी। इसके अलावा उनका कहना था कि किसी भी मदरसे या संस्कृत विद्यालय में धर्म से जुड़ी चीज़ें पढ़ाने की ज़िम्मेदारी सरकार की नहीं है। सरकार को इससे कोई आपत्ति नहीं होगी अगर कोई सामाजिक संगठन या या गैर सरकार संगठन इसका ज़िम्मा लेता है।

धार्मिक पढ़ाई सरकार की ज़िम्मेदारी नहीं
उनके मुताबिक गैर सरकारी संगठन भी महज़ चुनिन्दा नियमों के तहत ही ऐसे विद्यालय चला सकते हैं। इसके पीछे तर्क भी बहुत आसान हैं अगर मदरसे में कुरान पढ़ाने का खर्च राज्य सरकार को उठाना पड़ता है तो आने वाले समय में गीता और बाइबल पढ़ाने का खर्च भी सरकार के ज़िम्मे आएगा। लिहाज़ा धर्म के लिहाज़ से होने वाली पढ़ाई के मामले में सरकार कोई मदद नहीं करेगी।
इसलिए ऐसे मदरसों और संस्कृत विद्यालयों को बंद करने का फैसला लिया जा रहा है। आखिर में बचते हैं मदरसों में और संस्कृत विद्यालयों में पढ़ाने वाले शिक्षक, असम सरकार ने इस पर भी अपना मत साफ किया है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि इन शिक्षकों का वेतन नहीं रुकेगा और साथ ही साथ इन्हें सामान्य विद्यालयों में पढ़ाने का अवसर मिलेगा।

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