आदमी बन कर अपनी बेटी का खर्च उठाती है पाकिस्तान की यह औरत

विभव देव शुक्ला

औरतों के लिए तमाम जगहें और तमाम हालात काफी मुश्किल होते हैं। भले उनके अधिकारों की लड़ाई जम कर लड़ी जा रही हो लेकिन महिलाओं के मामले में ऐसे तमाम पहलू हैं जिनमें बदलाव की ज़रूरत है। महिलाओं को होने वाली कुछ परेशानियाँ हमें नज़र आ जाती हैं पर बहुत सी परेशानियाँ ऐसी भी होती हैं जिन पर हमारा ध्यान जाता ही नहीं। पाकिस्तान के लाहौर में एक ऐसी ही कहानी सामने आई है जिसकी सच्चाई स्वीकार पाना वाकई मुश्किल है।

पूरे परिवार में कोई आदमी नहीं
पाकिस्तान में ऐसी महिलाओं के सामने मुश्किल बहुत हैं जो काम करती हैं या करना चाहती हैं। उस पर जब महिला अकेली हो और उसकी बेटी भी मौजूद हो तब बात और उलझ जाती है। पाकिस्तान के लाहौत में फरहीन नाम की एक महिला रहती हैं जिनके साथ महज़ उनकी बेटी रहती है। उनकी बेटी की उम्र 9 साल है और पूरे परिवार में कोई आदमी नहीं है लिहाज़ा घर की ज़िम्मेदार पूरी तरह उनके कंधों पर है।
उनके सामने आने वाली दिक्कतों की शुरुआत भी ठीक यहीं से होती है। अपना घर चलाने और बेटी की देखभाल करने के लिए उन्हें काम करना पड़ता है। फरहीन लाहौर के अनारकली बाज़ार में दुकान चलाती हैं और दुकान चलाने के लिए उन्हें आदमी बनना पड़ता है, आदमियों की तरह कपड़े पहनने पड़ते हैं। कुल मिला कर महिला बन कर उनके लिए दुकान चला पाना बिलकुल आसान नहीं होगा।

मदद के लिए आगे आए लोग
जब महज़ दुकान से काम नहीं चलता तब फरहीन अक्सर गाड़ी भी चलाती हैं। उनका कहना है कि महिला बन कर दुकान चलाने से न तो फायदा होगा और न ही सुरक्षा के लिहाज़ से अच्छा होगा। क्योंकि अनारकली बाज़ार पूरी तरह बड़े-बड़े व्यापारियों से प्रभावित है ऐसे में एक महिला का वहाँ व्यापार करना बहुत मुश्किल होगा। फेसबुक पर मौजूद पेज ‘हयूमन्स ऑफ लाहौर’ के मुताबिक फरहीन अपनी बेटी के साथ एक हॉस्टल में रहती हैं।
जैसे ही लोगों को इस कहानी के बारे में पता लगा तब लोगों ने उनके लिए रुपए इकट्ठा करना शुरू किया। तमाम लोग मदद के लिए आगे आए और अभी तक उनके लिए लगभग 2 लाख रुपए इकट्ठा हो चुके हैं। भले लोग भारी संख्या में मदद के लिए आगे आए लेकिन इस बात को भी नकारा नहीं जा सकता है कि उसी समाज में फ़रहीन के लिए जीवनयापन तक मुश्किल है। उसी समाज में फरहीन को अपनी ज़िन्दगी चलाने के लिए अपनी पहचान छुपानी पड़ रही है।

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