माहवारी जाँचने के लिए छात्राओं से उतरवा लिए गए उनके अंडर गारमेंट्स

विभव देव शुक्ला

हमारे समाज में माहवारी को लेकर कई तरह की मान्यताएँ हैं, समाज के हर हिस्से में इसे लेकर सोच और समझ का तौर तरीका काफी अलग है। कहीं जागरूकता है तो कहीं जागरूक होने की कोशिश। लेकिन इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि यह ऐसा मुद्दा है जिसे लेकर चर्चा का बाज़ार हमेशा गर्म रहता है। माहवारी से जुड़ी चर्चाओं से जुड़ा एक मामला सामने आया है, जिसमें एक महाविद्यालय में पढ़ने वाली 68 छात्राओं को अपने अंडरगारमेंट्स उतारने पड़ गए।

गुजरात के भुज की घटना
गुजरात के भुज में श्री शाहजानन्द गर्ल्स इंस्टीट्यूट है, जहाँ यह घटना हुई है। महाविद्यालय के छात्रावास की संयोजक ने शिकायत की जिसके मुताबिक तमाम छात्राएँ जिनकी माहवारी चल रही थी वह रसोई में दाखिल हुईं। मंदिर के पास गईं और अपने साथ रहने वालों को छुआ जिसके बाद महाविद्यालय की प्राचार्या ने उन छात्राओं को बाथरूम में बुलाया गया।
इतना ही नहीं उन्हें महाविद्यालय के भीतर परेड करनी पड़ी। इसके अलावा उनकी माहवारी नहीं चल रही है यह साबित करने के लिए उन्हें अपने अंडरगारमेंट्स तक उतारने पड़े। इस मामले में अभी तक कोई प्राथमिकी नहीं दर्ज की गई है लेकिन क्रान्ति गुरु श्यामजी कृष्ण वर्मा विश्वविद्यालय की कुलपति ने मामले की जांच करने के लिए एक समिति का गठन किया है।

कुल 68 छात्राओं के साथ हुई घटना
यह विश्वविद्यालय भुज स्थित स्वामीनारायण मंदिर (नर नारायण देवगढ़ी) के अनुयायियों द्वारा चलाया जाता है। यह साल 2012 में स्थापित हुआ था और साल 2014 में श्री स्वामी नारायण मंदिर के भीतर इसकी नई इमारत बना दी गई थी। महाविद्यालय में बीकॉम, बीए, और बीएससी जैसे पाठ्यक्रम पढ़ाए जाते हैं और यहाँ लगभग 1500 छात्राएँ पढ़ रही हैं। लगभग 68 छात्राएँ जो दूर-दराज के इलाकों से आती हैं उन्हें महाविद्यालय के छात्रावास में रखा जाता है।
नियमों के मुताबिक जिन लड़कियों की माहवारी जारी होती है उनका रसोई और मंदिर के भीतर दाखिल होना पूरी तरह मना है। यहाँ तक कि उनका बाकी छात्राओं को छूना भी मना है, जिसके बाद छात्रावास की संयोजक ने महाविद्यालय की प्राचार्या रीता रनिंगा को इस बात की जानकारी दी। उनका कहना था कि जिन छात्राओं की माहवारी चल रही थी वह छात्रावास में दाखिल हुई हैं और बाकी छात्राओं से भी मिलीं। वह रसोई में भी दाखिल हुईं और मंदिर के अअंदर भी गईं।

महज़ दो छात्राओं के साथ थी परेशानी
एक समाचार समूह से बात करते हुए छात्रावास में रहने वाली एक छात्रा ने कहा ‘बुधवार के दिन हम पर तमाम आरोप लगाए गए और बेइज्ज़ती भी की गई। गुरुवार के दिन जब हम पढ़ने गए तब प्राध्यापक अंजलीबेन ने हमारी शिकायत प्राचार्य से कर दी। इसके बाद हमें क्लास से बाहर निकाल दिया गया और पंक्ति बना कर जाने के लिए कह दिया गया।
प्राचार्य ने हमें बहुत बुरा भला कहा और बार-बार यही पूछा कि हम में से किसकी माहवारी जारी है? जिसके बाद जिन दो छात्राओं की माहवारी जारी थी वह किनारे खड़ी हो गईं। अंत में हमें बाथरूम लेकर गए और महिला शिक्षकों ने हमारे अंडरगारमेंट्स उतरवाए जिससे वह जान सकें कि हम में से कोई झूठ तो नहीं बोल रहा है।

अक्सर सुनाते हैं माहवारी के लिए
वहीं 19 साल की शक्ति नाम की दूसरी छात्रा ने भी समाचार समूह से इस बारे में बात की। उसने कहा कि हम बहुत दूर के गाँवों से आते हैं, इसमें कक्षा 1 से लेकर 12 तक का विद्यालय भी चलता है। उनके लिए अलग से छात्रावास बनाया गया है लेकिन महाविद्यालय में पढ़ने वाली छात्राओं के लिए कोई छात्रावास नहीं है। हमें विद्यालय में पढ़ने वाली छात्राओं के साथ रहना पड़ता है।
इसके बाद उसने कहा छात्रावास के संयोजक, ट्रस्टी और महाविद्यालय के प्राचार्य माहवारी के मुद्दे पर अक्सर हमें प्रताड़ित करते हैं। हमें माहवारी के लिए सज़ा भी दी जाती है, उन्होंने हमें अंडरगारमेंट्स उतारने के लिए कहा। उन्हें ऐसा लग रहा था कि हम झूठ बोल रहे थे लेकिन गुरुवार के दिन उनका रवैया और बुरा हो गया।

मंदिर के चलते नियमों का पालन
महाविद्यालय के एक ट्रस्टी ने कहा हम किसी भी तरह का कदम उठाने के लिए तैयार हैं लेकिन उसके पहले हमें छात्रावास छोड़ना पड़ेगा। अंत में हमसे एक पत्र पर हस्ताक्षर करवाया जिसमें यह लिखा हुआ था कि ऐसी कोई घटना नहीं हुई है। जब छात्राओं के बीच पुलिस में शिकायत दर्ज करने की बात छिड़ी तब महाविद्यालय प्रशासन ने उन्हें धमकी देना शुरू कर दिया।
मामले पर क्रान्तिगुरु श्यामजी कृष्ण वर्मा कच्छ विश्वविद्यालय के कुलपति ने भी बयान दिया है। उनका कहना है कि जो भी इस घटना में दोषी होगा और ज़िम्मेदार पाया जाएगा हम उस पर कार्यवाई करेंगे। महाविद्यालय के एक ट्रस्टी का कहना है कि हम एक चैरिटेबल संस्था चलाते हैं और उसके लिए एक टोकन फी लेते हैं। चूंकि हमारे संस्थान के भीतर एक मदिर भी है इसलिए हमें कुछ धार्मिक नियमों को मानना पड़ता है।

Next Post

इस व्यक्ति ने इस तरह पुलवामा में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि

Fri Feb 14 , 2020
विभव देव शुक्ला पुलवामा आतंकी हमले के बारे में सभी अच्छे से जानते हैं और जो फौजी उसमें शहीद हुए उनसे जुड़े लोग उसका दर्द भी बखूबी समझते हैं। आज पुलवामा में हुए आतंकी हमलों को एक साल पूरे हो गए, पूरा देश शहीद सैनिकों को याद कर रहा है […]