गगनयान : भीषण ठंड…खतरों के बीच ट्रेनिंग ले रहे भारतीय अंतरिक्ष यात्री

मास्को

भारतीय वायुसेना के 4 जांबाज पायलट देश की प्रतिष्ठा से जुड़े महत्वाकांक्षी मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ को सफलतापूर्वक अंजाम देने के लिए रूस में बेहद कड़ा प्रशिक्षण ले रहे हैं। रूस के गैगरिन रिसर्च ऐंड टेस्ट कॉस्मोनॉट ट्रेनिंग सेंटर में ट्रेनिंग ले रहे भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को इस गोपनीय ट्रेनिंग के दौरान जान तक को भी जोखिम में डालना पड़ रहा है। आइए जानते हैं कि देश से करीब 4 हजार किलोमीटर दूर भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को किन-किन चुनौतियों से लोहा लेना पड़ रहा है…

पांच साल का कोर्स एक साल में

रिपोर्ट के मुताबिक रूसी अंतरिक्ष यात्रियों को प्रशिक्षण में करीब 5 साल लगते हैं लेकिन भारतीय यात्रियों के लिए एक विशेष ट्रेनिंग प्रोग्राम बनाया गया है। इसके जरिए भारतीय यात्रियों को 12 महीने में ही अंतरिक्ष यात्रा के लायक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसी ट्रेनिंग सेंटर में भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा ने भी प्रशिक्षण लिया था। उनके बैकअप रहे रवीश मल्होत्रा ने भी स्टार सिटी में प्रशिक्षण लिया था।

मुश्किल हालातों में जिंदा रहने के तरीकेे सीख रहे, खूंखार जंगली जानवरों के बीच बिता रहे समय

अब रूसी भाषा सीख रहे भारतीय यात्री | पूरा प्रशिक्षण कार्यक्रम रूसी भाषा में है, इसलिए अंग्रेजी बोलने वाले भारतीय अंतरिक्षयात्रियों को रूसी भाषा सीखनी पड़ रही है। ट्रेनिक सेंटर के प्रमुख व्लेसोव ने कहा कि सोयूज अंतरिक्ष यान के अंदर सभी दस्तावेज और निर्देश रूसी भाषा में हैं।

भारत की जरूरत के हिसाब से प्रशिक्षण | ट्रेनिंग सेंटर के प्रमुख पावेल व्लेसोव ने कहा कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम विशेष रूप से तैयार किया गया है। इसमें अंतरिक्ष और शारीरिक प्रशिक्षण के अलावा उन्नत इंजीनियरिंग की भी पढ़ाई कराई जा रही है।

भीषण ठंड के बीच जंगल में अकेले रह रहे यात्री

इस प्रशिक्षण के दौरान भारतीय यात्रियों को जिंदा रहने के तरीके सीखाए जा रहे हैं। इसके तहत उन्हें बताया जा रहा है कि जब अंतरिक्ष से लौटने लगें तो कुछ गड़बड़ी होने पर क्या करें। इस समय भारतीय यात्री मास्को में जंगल और दलदल के बीच अपना समय बिता रहे हैं जहां कई खुंखार जंगली जानवर ही उनके साथी हैं। पहले उन्हें क्लास रूम में ट्रेनिंग दी जा रही है और उसके बाद उन्हें दो दलों में 3 दिन और 2 रातों के लिए जिंदा रहने की वास्तविक ट्रेनिंग दी जाएगी। बर्फीले जंगल से निकलने के बाद भारतीय यात्री पहाड़ी दर्रो और यहां तक कि समुद्र के अंदर रहेंगे। इन यात्रियों को गर्मी के मौसम में सोची ले जाएगा जहां वे समुद्र में रहेंगे।

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