विश्व कप में सचिन को कंधे पर बैठाया जाने वाला पल बना दो दशकों का सबसे शानदार पल

विभव देव शुक्ला

क्रिकेट हमारे देश के लिए महज़ खेल नहीं है, खेल से बढ़ कर है और खेल से बढ़ कर बहुत कुछ है। चाहे जज़्बात कहा जाए या धर्म, क्रिकेट के लिए इस तरह के सारे शब्द कम ही लगते हैं। यही वजह है कि क्रिकेट से जुड़े हर खास पल को सहेजना और सदियों तक अपने ज़ेहन में रखना हमारी फितरत है। भारत ने साल 2011 के विश्व कप में ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। जीत के बाद भारतीय टीम के तमाम खिलाड़ियों ने सचिन को अपने कंधे पर बैठा कर वानखेड़े स्टेडियम का चक्कर भी लगाया था।

खेल में कितनी ताकत होती है
क्रिकेट को किसी भी सूरत में पसंद करने वाले लोगों के लिए यह पल बेहद खास था। इसके अलावा सचिन को पसंद करने वालों के लिए उससे बेहतर नज़ारा शायद ही कोई और हो। जिस पल में सचिन को खिलाड़ियों ने अपने कंधे पर बैठा कर स्टेडियम घुमाया था उसे पिछले 20 सालों का ‘सर्वश्रेष्ठ लॉरेस खेल क्षण’ करार दिया गया है।
सचिन तेंदुलकर के इस पल को विजेता बनाने के लिए सबसे ज़्यादा वोट मिले। सोमवार के दिन बर्लिन में यह पुरस्कार लेते हुए सचिन तेंदुलकर ने कहा ‘इस तरह के करिश्माई पलों से पता चलता है कि खेल में कितनी ज़्यादा ताकत होती है। किसी घटना में ऐसा कितनी बार होता है जिसमें विचार अलग-अलग तरह के न हों?

यह पल हमेशा साथ रहेगा
बहुत ही कम ऐसा होता है जब पूरा देश खुशी मनाता है। कम ही ऐसा होता है जब लोगों के विचार अलग-अलग नहीं होते हैं। हर कोई एक साथ बैठता है और खुशी मनाता है। इस तरह की बातों से पता लगता है कि खेल में कितनी ताकत होती है और यह हमारी ज़िंदगी में कितना जादू कर सकता है। यह पल हमेशा मेरे साथ रहेगा।
भारतीय टीम का 2011 विश्वकप जीतना कई मामलों में खास था, 1983 के बाद भारत ने दोबारा क्रिकेट की दुनिया का सबसे बड़ा खिताब अपने नाम किया था। जीत के साथ एक और बेहद खास बात यह थी कि सचिन तेंदुलकर विजेता टीम का हिस्सा थे। जिसके बाद भारतीय टीम के कई खिलाड़ियों ने उन्हें अपने कंधे पर बैठा कर पूरे स्टेडियम में घुमाया था।

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