‘नशेड़ी तोतों’ से भी जूझ रहे किसान

ब्यूरो | मंदसौर

गहरे संकट के दौर से गुजर रही अफीम की खेती, फसल बचाने के लिए कर रहे तरह-तरह के जतन

प्रदेश के मालवा की खास पहचान अफीम की खेती इन दिनों गहरे संकट से गुजर रही है। पहले बारिश और ओलावृष्टि ने फसल खराब की। इसके बाद फसलों को चोरों, नीलगाय और नशेड़ी तोतों से लगातार नुकसान का खतरा बना हुआ है। किसान दिन-रात अफीम की फसल की कड़ी निगरानी कर रहे हैं। इन दिनों अफीम की फसल खेतों में लहलहा रही है, लेकिन काले सोने के नाम से विख्यात अफीम की फसल पर लगातार खतरा बना हुआ है।

जिले में नीलगाय और नशेड़ी तोतों का खतरा लगातार बना हुआ है। नीलगाय से बचने के लिए किसानों ने अफीम की खेती के चारों और स्टील और लोहे की जालियां बनवा रखी हैं। नीलगाय इन जालियों को भी तोड़कर अफीम की फसल चट कर जाती हैं। इसी तरह यहां के तोतों को भी अफीम के नशे की लत लग गई है। यहां के तोते अफीम के डोडे को निशाना बनाते हैं और डोडा तोड़कर अपनी चोंच में लेकर उड़ जाते हैं। तोतों को जब अफीम के नशे की लत लग जाती है तो वह बार-बार अफीम के डोडे खाने आते हैं। इसके लिए किसान दिन-रात अपनी फसल की निगरानी में लगे हैं। चोरों, नीलगाय और तोतों से अफीम की फसल को लगातार खतरा बना हुआ है। नीलगाय के लिए किसान ने जालियां लगाई हैं। इसके बावजूद निगरानी करनी पड़ती है, लेकिन तोतों की निगरानी करने के लिए किसानों को अच्छी खासी मशक्कत करनी पड़ती है।

ऐसा इसलिए, क्योंकि, तोतों का रंग भी हरा है और अफीम की फसल का रंग भी हरा है। इसलिए जब तोता अफीम के डोडे खाता है तो उसकी पहचान करना बड़ी मुश्किल हो जाती है। किसान हल्ला कर तोतों को भगाने का काम करते हैं। किसान दीपक बैरागी खेड़ा सीतामऊ ने बताया कि मौसम परिवर्तन के कारण पौधे की ऊंचाई बढ़ जाने के कारण उसे गिरने से बचाने के लिए बांस व सलिया गाढ़ने के साथ रस्सी व सुतली से चारों ओर से बांध रहे हैं। इसमें उन्हें लागत भी अधिक लग रही है। खेड़ा के किसान सुनील पाटीदार ने बताया कि यह अतिरिक्त खर्च सुरक्षा व बचाव के लिए हमें करना मजबूरी है। पशु व पक्षी से बचाव के लिए ऊपर व साइड में जाली लगाना पड़ रहा है। किसान अशोक सोलंकी के अनुसार मौसमी बीमारी से बचाव के लिए दवाई छिड़काव कर फसल को नुकसान से बचा रहे हैं।

लाखों खर्च के बाद भी नहीं मिली समस्या से निजात

वन विभाग ने नीलगाय पकड़ने के लिए क्षेत्र में पूर्व में बोमा पद्धति अपनाई थी, लेकिन यह भी सफल नहीं रही। लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी लगातार नीलगाय का आतंक क्षेत्र में लगातार बढ़ रहा है। विभाग के पास अभी नीलगाय को पकड़ने की कोई योजना नहीं है। वहीं, पुलिस का कहना है कि अफीम की फसल को चोरों से नुकसान होने की आशंका को देखते हुए पुलिस लगातार किसानों से संपर्क में है। अफीम वाले क्षेत्र में पुलिस लगातार पैट्रोलिंग भी कर रही है। अगर किसानों को कोई सूचना मिलती है तो वे पुलिस को इसकी सूचना दे सकते हैं। पुलिस ने विश्वास दिलाते हुए कहा है कि किसानों की अफीम फसल की पूरी सुरक्षा की जाएगी।

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