हमारी गलती है कि हमने कश्मीर और 84 के दंगों पर फिल्म नहीं बनाई – तिगमांशु धूलिया

विभव देव शुक्ला

नेताओं से लेकर फिल्मी कलाकारों के बयान अक्सर चर्चा में रहते हैं, अगर बयान एक दूसरे के क्षेत्र से जुड़ा हो तब बयान का असर दोगुना होता है। मिसाल के तौर पर अगर फिल्मी दुनिया से जुड़ा इंसान सामाजिक या राजनीतिक मुद्दे पर अपनी राय रखता है तो उसकी चर्चा खूब होती है। इसके ठीक उलट एक राजनीति की दुनिया से जुड़ा व्यक्ति फिल्मों पर अपनी बात बात रखता है तो ऐसी बातों की चर्चा भी खूब होती है।

मुर्गा लड़ाई देखने की आदत
ऐसा ही कुछ हुआ एक समाचार समूह के कार्यक्रम के दौरान जिसमें शामिल होने पहुँचे बॉलीवुड के मशहूर फिल्म निर्देशक तिगमांशु धूलिया। समाचार प्रस्तोता के सवाल पूछने से पहले ही तिगमांशु ने कहा ‘आप लोगों को मुर्गों की लड़ाई देखने की आदत पड़ गई है’ और इसके बाद दर्शकों की तरफ इशारा करते हुए कहा ‘आप लोगों को भी, रोज़ टीवी पर यही सब देख रहे हैं और आज भी यही देख रहे हैं।’
इसके बाद प्रस्तोता ने कहा यह वाद-विवाद है, लोकतंत्र का सबसे मजबूत स्तम्भ। जवाब में तिगमांशु ने कहा ‘मैं फिल्म निर्माता हूँ और आस-पास बैठे लोग कलाकार हैं, मैं कोई राजनीतिक विशेषज्ञ थोड़े हूँ, जो सामने चीज़ें दिखती हैं उस पर हम अपने विचार रखते हैं। फिर प्रस्तोता ने कहा बाकी कलाकार राजनीतिक विशेषज्ञ की तरह ही बात कर रहे थे।

फिल्मों पर नेता बात कर सकते हैं?
इसके जवाब में तिगमांशु ने कहा ‘आप किसी राजनीतिक विशेषज्ञ से कहिए कि फिल्मों पर ऐसे बात करके दिखाएँ? हम फिल्मों में काम करने के बावजूद राजनीति की थोड़ी बहुत समझ रखते हैं जो राजनीति में रहते हैं उनका कला और संस्कृति से क्या वास्ता? बुलाइए और बात कराइए उनसे मेरी? मीडिया के तौर तरीकों पर फिल्म बनाने से जुड़े सवाल को लेकर उन्होंने कहा ‘हाँ अभी तो लड़ाई चल रही है देखिये किस नतीजे पर पहुँचती है, फिल्म तो तब बनेगी। अगर हमने फिल्म पहले बना दी और फिल्म के हिसाब से लड़ाई का नतीजा न रहा तो आप लोग हमें और गाली देंगी।’

फिल्म निर्माताओं की गलती
तमाम अलग राजनीतिक मुद्दों पर फिल्म बनाने को लेकर भी तिगमांशु ने कई अहम बातें कहीं। उन्होंने कहा मुझे तो ग्लानि होती है और हमारे क्षेत्र के तमाम लोगों को दुख होता है कि ऐसे तमाम विषय हैं जिन पर फिल्में बननी चाहिए लेकिन हम बना नहीं पाए। मुझसे किसी अखबार वाले ने अभी जयपुर में पूछा तब मैंने कहा था कि यह बहुत बड़ी गलती है कि हमने 84 के दंगों पर फिल्म नहीं बनाई।
बनी होंगी लेकिन शायद बहुत छोटे बजट की थी या उनकी प्रचार बहुत अच्छे से नहीं हुआ या लोगों ने उसे देखा नहीं। हमने कश्मीरी पंडितों और कश्मीर में जो हो रहा है और जो पहले हुआ उस पर भी फिल्म नहीं बनाई। यह गलती है हमारे जैसे फिल्म निर्माताओं की, हमने इस तरह के मुद्दों को अभी तक नहीं छुआ है। अभी मैं खुद ऐसी फिल्म बनाने के बारे में नहीं सोच रहा हूँ पर आने वाले समय में सोचना है।

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