मेदांता में जिंदगी बनी मौत

नगर संवाददाता | इंदौर

एक घंटे तक इस तरह डॉक्टर के इंतजार में आईसीयू में जिंदगी से जुझता रहा युवक

मेदांता अस्पताल में भर्ती एक युवक को डॉक्टरों द्वारा मृत घोषित करने पर परिजन ने उसके अंतिम संस्कार की तैयारियां कर लीं। इसी दौरान युवक को एम्बुलेंस में उसके घर लाया गया, जहां उसकी सांसें चलने लगीं। इस पर परिजन तत्काल उसे फिर उसी अस्पताल में ले गए। वहां डॉक्टरों द्वारा इलाज नहीं करने पर बॉम्बे हॉस्पिटल ले गए तो वहां भी मृत घोषित किया गया। गुस्साए परिजन व रिश्तेदार शव लेकर फिर मेदांता अस्पताल पहुंचे और जमकर हंगामा करते हुए तोड़फोड़ पर उतारू हो गए। गुस्साई भीड़ को नियंत्रित करने के लिए तीन थानों का पुलिस बल बुलाना पड़ा। साढ़े तीन घंटे तक चले हंगामे के बाद शव का पोस्टमॉर्टम कराया गया, जिसकी रिपोर्ट मिलने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

युवक का नाम चंद्रशेखर पिता हरनाथसिंह शेहरिया (21) निवासी छोटी शिवबाग कॉलोनी, वेलोसिटी टॉकीज है। वह गवर्नमेंट न्यू कॉलेज में बीए एलएलबी द्वितीय वर्ष का छात्र था। करीब एक साल से किडनी में खराबी होने के कारण उसका डॉयलेसिस किसी अन्य अस्पताल में कराया जा रहा था। पिता हरनाथसिंह के मुताबिक 21 फरवरी की रात उसकी हालत बिगड़ने पर मेदांता अस्पताल में आईसीयू में भर्ती किया तो स्टाफ ने बताया कि डॉक्टर सुबह 6 बजे आकर देखेंगे, लेकिन 2 बजे तक नहीं आए। फिर आने के बाद उसे देखा और बताया कि दिमाग की नस फट गई है। सीटी स्कैन कराया गया।

आईसीयू में भीड़ देख दुबक गए डॉक्टर

आईसीयू में गुस्साए परिजन ने इलाज करने वाले डॉक्टर से बात करने को कहा। इस बीच डॉक्टर ने फोन पर ही मेल नर्स को इलाज शुरू करने को कहा तो उसे फिर वेंटिलेटर पर लिया गया। मां कलावती और रिश्तेदार सचिन ने बताया वह इस दौरान रोया और चिल्लाया भी, लेकिन डॉक्टर नहीं आए। इस बीच करीब डेढ़ सौ लोग आईसीयू में जमा हो गए। विजय नगर, एमआईजी और लसूड़िया टीआई पुलिस बल सहित मौके पर पहुंचे।

शरीर में हरकत देख चौंक पड़े परिजन

रविवार दोपहर 12 बजे अस्पताल स्टाफ ने परिजन को बताया कि उसकी मौत हो चुकी है। इस पर डिस्चार्ज पेपर बनवाने के साथ अस्पताल प्रबंधन ने 35 हजार रुपए का बिल बनाया, जो परिजन ने जमा कर दिए। उधर, रिश्तेदारों ने उसके अंतिम संस्कार की तैयारी कर ली और एम्बुलेंस से शव घर ले जाया गया, जहां उतारने से पहले ही उसकी सांसें चलने लगीं। हाथ-पैरों भी हरकत शुरू हो गई। इस पर तुरंत उसे फिर मेदांता अस्पताल ले जाया गया।

अस्पताल ने कहा – डेड नहीं, ब्रेन डेड का बताया था

मेदांता अस्पताल के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. संदीप श्रीवास्तव व इलाज करने वाले डॉ. असद रियाज का कहना है कि चंद्रशेखर का एक साल से डॉयलेसिस चल रहा था। जब उसे लाया गया तो वह बेहोश था। सीटी स्कैन रिपोर्ट के आधार पर परिजन को बता दिया था कि ब्रेन स्टेम्स के कारण उसे ब्लीडिंग हो रही है। उक्त हिस्सा सांस, ब्लडप्रेशर और धड़कन नियंत्रित करता है। उसका ब्रेन डेड हो गया था। इसे लेकर परिजन की काउंसलिंग कर उन्हें बता दिया था। वे खुद ही रविवार को सहमति से उसे ले गए थे। ब्रेन डेड के तहत कभी-कभी स्थिति ऐसी होती है कि सांसें चलने के साथ शरीर में हलचल होती है। इसके चलते उसे अस्पताल की ओर से मृत घोषित नहीं किया था। डॉक्टर इलाज के लिए तत्पर थे, लेकिन आईसीयू में ही डेढ़ सौ से ज्यादा लोग मारपीट पर आमादा थे। इसके चलते इलाज शुरू नहीं हो सका। लोगों ने आईसीयू, वेंटिलेटर सहित कई उपकरणों को नुकसान पहुंचाया।

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