इतना बड़ा धन्यवाद लिखने के बावजूद सबसे बड़ी चीज़ लिखना भूल गए ट्रम्प

विभव देव शुक्ला

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने अपना दो दिवसीय भारत दौरा आज गुजरात के अहमदाबाद से शुरू किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उस मौके पर ट्रम्प का स्वागत भी किया। इसके ठीक बाद डोनल्ड ट्रम्प साबरमती आश्रम गए। आश्रम में उन्हें विजिटर बुक दी गई और उसमें ट्रम्प ने मोदी को धन्यवाद लिखा। लेकिन धन्यवाद लिखने के बावजूद ट्रम्प एक बात लिखना भूल गए जिसे लेकर चर्चाओं का बाज़ार फिलहाल गरम है।

क्या भूल गए डोनल्ड ट्रम्प
साबरमती आश्रम में पहुँच कर ट्रम्प और उनकी पत्नी मेलानिया ने चरखा देखा और उसे चलाया भी। मौजूद लोगों ने दोनों को चरखे के बारे में भी बताया और दोनों के लिए यह बेहद अलग अनुभव था। इसके बाद ट्रम्प को विजिटर बुक दी गई, जिसमें ट्रम्प लिखते हैं,
‘मेरे शानदार दोस्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए, इस बेजोड़ दौरे के लिए धन्यवाद।’
इतना बड़ा धन्यवाद लिखने के बावजूद ट्रम्प उस नाम का ज़िक्र करना भूल गए जिसकी वजह से साबरमती आश्रम और चरखा पहचाना जाता है ‘महात्मा गांधी।’ यह खुद में हैरान कर देने वाली बात थी कि साबरमती आश्रम में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के बावजूद ट्रम्प ने धन्यवाद संदेश में महात्मा गांधी का ज़िक्र नहीं किया।

ओबामा ने किया था उल्लेख
इसके ठीक उलट साल 2015 में अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा भी भारत दौरे पर आए थे। ओबामा भी साबरमती आश्रम गए थे और उन्होंने विजिटर बुक में महात्मा गांधी का बखूबी ज़िक्र किया था। ओबामा ने अपने धन्यवाद संदेश में लिखा था,
“मार्टिन लूथर किंग ने जो कहा था वो आज भी सच है। गांधी के विचार आज भी पूरी तरह से भारत में मौजूद हैं और यह दुनिया के लिए एक महान तोहफा है। हम कामना करते हैं कि सभी देश और लोग गांधी की सत्य और प्रेम की भावना के बीच सदभावना से रहें।”

भाषण में ज़िक्र किया
यह मुद्दा फिलहाल विमर्श का केंद्र बना हुआ है कि आखिर कैसे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का ज़िक्र करना भूल गए। हालांकि अहमदाबाद के मोटेरा स्टेडियम में भाषण देते हुए ट्रम्प ने महात्मा गांधी का ज़िक्र किया था और उन्हें महान हस्ती बताया था।
इसके अलावा यह भी कहा था कि भारत के इतिहास का एक बड़ा आंदोलन नमक आंदोलन साबरमती आश्रम से ही शुरू हुआ था। इन बातों के बाद भी इस बात को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता कि ट्रम्प के संदेश में देश के राष्ट्रपिता का ज़िक्र नहीं था।

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