कुणाल कामरा के उड़ान प्रतिबंध को लेकर उच्च न्यायालय ने डीजीसीए को जमकर सुनाया

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर। इंडिगो ने एक विमान में पत्रकार अर्णब गोस्वामी को कथित रूप से परेशान करने के लिए स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा पर जांच किये बिना अनिश्चितकालीन यात्रा प्रतिबंध लगा दिया था।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि विमानन नियामक डीजीसीए को इंडिगो के अलावा अन्य एयरलाइनों की कार्रवाई को प्रमाणित नहीं करना चाहिए था।

इस कार्रवाई के ख़िलाफ़ कुणाल कामरा ने इंडिगो एयरलाइन को 25 लाख का नोटिस भेजा था। कामरा ने अपनी याचिका में कहा कि इंडिगो ने आंतरिक समिति के किसी निर्णय पर पहुंचने से पहले ही उन पर छह महीने का प्रतिबंध लगा दिया जबकि अन्य एयरलाइनों-एअर इंडिया, स्पाइसजेट और गोएयर ने भी उन पर इस तरह का प्रतिबंध लगा दिया।

कॉमेडियन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ताओं विवेक तन्खा, गोपाल शंकरनारायण और मोहित माथुर ने उच्च न्यायालय का रूख कर डीजीसीए को प्रतिबंध हटाने के लिए एयरलाइनों को निर्देश दिये जाने का अनुरोध किया था।

चार एयरलाइंस द्वारा कामरा को बैन किये जाने पर उन्होंने अपनी सफाई में कहा था, “मोदीजी मैं पैदल चल सकता हूँ, या उसपर भी बैन है?” उन्होंने विस्तारा को टैग करते हुए लिखा था कि अरे बैन ही कर दो यार। मैं आप पर कोई राय नहीं बनाऊंगा। मैं तो खुद ड्राइव करके गोवा जाने का प्लान बना रहा हूँ। अब तो थोड़ा ब्रेक लेना भी बनता है।

ये मेरे लिए बिल्कुल भी चौंकाने वाला नहीं है कि बोलने की आज़ादी के अपने अधिकार के इस्तेमाल के चलते 3 एयरलाइंस ने मेरी विमान यात्रा पर अस्थाई प्रतिबंध लगा दिया है। सच्चाई ये है कि मैंने किसी भी मौके पर बाधा नहीं पहुंचाई। विमान में सवार किसी भी यात्री की सुरक्षा को खतरे में नहीं डाला। अगर मैंने किसी को कुछ नुकसान पहुँचाया, तो वो है पत्रकार अर्णब गोस्वामी के अहम् को।

उन्होंने नागर विमानन आवश्यकता (सीएआर) के कथित उल्लंघन में कार्रवाई करने के लिए एयरलाइंस के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की है। न्यायमूर्ति नवीन चावला ने डीजीसीए को यह बताने के लिए कहा कि वह अन्य एयरलाइनों द्वारा की गई कार्रवाई के संबंध में क्या कदम उठाने का इरादा रखता है। न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई की तिथि 27 फरवरी तय की है।

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