बिहार में नहीं लागू होगी एनआरसी

पटना

एनपीआर-सीएए पर विपक्ष का जोरदार हंगामा, बजट पेश करने के बाद एनआरसी पर सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित

बिहार विधानसभा में एनआरसी लागू नहीं करने को लेकर प्रस्ताव कर पारित किया गया है। दिलचस्प बात यह रही कि इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित किया गया है। साथ ही विधानसभा में एनपीआर में संशोधन करने को लेकर भी प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया है। नीतीश कुमार ने विधानसभा में कहा था कि मेरे कहने पर एनपीआर पर चर्चा हुई और हम लोगों की तरफ से ऑफिशियल लेटर केंद्र सरकार को 15 फरवरी को पत्र जनगणना आयुक्त को भेजा गया है कि 2010 की तरह ही एनपीआर बिहार में लागू हो। तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार से सवाल भी किया था कि जो 18 दिसंबर 2019 को एनपीआर को लेकर नोटिफिकेशन जारी हुआ है कि 15 मई से एनपीआर लागू होगा तो क्या इस नोटिफिकेशन रद्द किया जाएगा?

इस पर नीतीश कुमार ने साफ कहा था कि जो नोटिफिकेशन पिछले साल आया था उसके मद्देनजर ये लेटर भेजा गया है। इसमें जो नई चीजों को शामिल किया गया है उसपर विमर्श किया गया है और 19 जनवरी के बाद एक-एक चीज को ध्यान में रखा गया है। नीतीश कुमार ने ये भी कहा कि 2020 में अभी भी एनपीआर को लेकर औपचारिक अधिसूचना नहीं जारी हुई कि किस आधार पर एनपीआर के तहत जानकारी एकत्रित की जाएगी। मंगलवार को बिहार में सुशील कुमार मोदी के बजट पेश किए जाने के बाद दोनों महत्वपूर्ण प्रस्तावों को पारित किया गया है। प्रस्ताव पारित होने के बाद बोले विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि सरकार विपक्ष के सामने झुक गई है। उन्होंने कहा कि हमको इस पर राजनीति नहीं करनी है, लेकिन हमसे जो उम्मीदें थीं, हमने उस पर काम किया है और सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कराने में मदद की है।

बजट सत्र शुरू होते ही सदन में हंगामा, मारपीट पर उतरे विधायक

बिहार विधानसभा के अंदर मंगलवार को उस वक्त अफरा-तफरी का माहौल हो गया जब कार्य स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान बीजेपी और आरजेडी विधायकों में मारपीट के हालात हो गए। हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही को 15 मिनट तक स्थागित करनी पड़ी। जब नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और एनआरसी के मुद्दे पर आरजेडी की ओर से कार्यस्थगन प्रस्ताव लाया जा रहा था तो बीजेपी विधायकों ने इसका विरोध किया। इसके बाद सदन में हंगामा होने लगा। इस दौरान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भाषण दे रहे थे। हंगामे के दौरान आरजेडी और बीजेपी के विधायक वेल में आ गए। इस दौरान आरजेडी के विधायक भाई वीरेंद्र और मंत्री प्रमोद कुमार के बीच हुई हाथापाई की नौबत आ गई।

तेजस्वी ने भाजपा विधायकों पर गुंडागद करने का आरोप लगाया

तेजस्वी यादव ने बीजेपी विधायकों पर सदन के अंदर गुंडागर्दी करने का आरोप लगाया। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के एनपीआर पर दिए बयान का हवाला देते हुए कहा कि एनपीआर को लेकर नोटिफिकेशन क्यों कराया गया। उन्होंने मुख्यमंत्री पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया। इसके साथ ही नाथू राम गोडसे का भी जिक्र सदन में हुआ। तेजस्वी यादव ने कहा कि गोडसे के लोग हम लोगों से जवाब मांग रहे हैं। एनपीआर पर बहस का कोई सवाल नहीं है। इसके बाद एनआरसी, एनपीआर और सीएए के विरोध में विपक्षी दलों ने बिहार विधानसभा के बाहर जमकर हंगामा किया। आरजेडी और सीपीआई-माले के विधायकों ने इसके खिलाफ राज्य सरकार को केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजने की मांग की।

नीतीश ने कहा – कांग्रेस ने किया था समर्थन

बिहार विधानसभा में सीएए, एनआरसी और एनपीआर पर हंगामे के बाद सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि एनआरसी का कोई प्रस्ताव आया ही नहीं है और एनपीआआर 2010 के प्रवाधान पर ही लागू होगा। इसके साथ ही सीएम नीतीश कुमार ने साफ-साफ कहा कि नागरिकता संशोधन कानून तीन देशों की अल्पसंख्यकों के हितों की सुरक्षा के लिए है। उन्होंने कहा कि ये केंद्र का कानून है और ये सही है या गलत, ये सुप्रीम कोर्ट तय करेगा। उन्होंने वर्ष 2003 में सीएए के प्रस्ताव का जिक्र कर कहा कि ये कांग्रेस के पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के बयान को कोट करते हुए कहा कि तब कांग्रेस ने इसका समर्थन किया था। सीएए बनाने वाली कमेटी में लालू प्रसाद भी थे। मैंने सीएए के सभी दस्तावेज को देखा है। उसका प्रियरंजन दास और नजमा हेपतुल्ला ने भी समर्थन किया था।

सीएम नीतीश ने सीएए का समर्थन करते हुए कहा कि 2003 में ही ये प्रस्ताव आया था तब कांग्रेस के लोगों ने इसका पूरा समर्थन किया था। इसके साथ ही सीएम नीतीश ने पीएम मोदी 22 दिसंबर 2019 के दिल्ली में दिए भाषण का हवाला देते हुए कहा कि जब से मेरी सरकार आई है एनआरसी पर कोई चर्चा नहीं हुई है। उन्होंने ये भी दावा किया कि बिहार में एनआरसी लागू नहीं होगी। सीएम नीतीश ने एनपीआर के बारे में कहा कि ये वर्ष 2010 के प्रावधान के अनुसार ही बिहार में लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि एक बार फिर जातिगत जनगणना का प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास भेजने वाले हैं।

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